शाह से बातचीत के बाद आईएमए ने अपना प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लिया
डॉक्टरों की यह संस्था मांग कर रही है कि ऐसे समय जब स्वास्थ्य देखभाल कर्मी कोविड-19 वैश्विक महामारी से जूझ रहे हैं, उनपर बढ़त हमलों से उनकी रक्षा करने के लिए केंद्र एक कानून लेकर आए।
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत के बाद 22 और 23 अप्रैल को प्रस्तावित ‘व्हाइट अलर्ट’ और ‘काला दिवस’ प्रदर्शनों को वापस ले लिया है।
डॉक्टरों की यह संस्था मांग कर रही है कि ऐसे समय जब स्वास्थ्य देखभाल कर्मी कोविड-19 वैश्विक महामारी से जूझ रहे हैं, उनपर बढ़त हमलों से उनकी रक्षा करने के लिए केंद्र एक कानून लेकर आए।
आईएमए द्वारा जारी बयान के अनुसार, गृह मंत्री ने चिकित्सा समुदाय के काम के लिए उनकी प्रशंसा की।
डॉक्टरों की संस्था ने बताया कि शाह ने कहा कि डॉक्टरों तथा अन्य स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों की सुरक्षा उनकी बड़ी चिंता है।
आईएमए ने एक बयान में कहा, ‘‘उन्होंने (केंद्रीय गृह मंत्री ने) आईएमए को हिंसा के खिलाफ एक केंद्रीय कानून लाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने सांकेतिक प्रदर्शन वापस लेने की प्रधानमंत्री की ओर से अपील की।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘सरकार के उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के मद्देनजर आईएमए प्रदर्शन को वापस लेता है। 22 अप्रैल को व्हाइट अलर्ट तथा 23 अप्रैल को काला दिवस रद्द किया जाता है। हम अपने सभी सदस्यों का उनकी अभूतपूर्व एकता तथा समर्थन के लिए आभार जताते हैं।’’
गौरतलब है कि कोविड-19 से निपटने में अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच आईएमए ने देशव्यापी ‘व्हाइट अलर्ट’ का आह्वान करते हुए डॉक्टरों तथा अस्पतालों से ऐसे हमलों के खिलाफ प्रदर्शन के तौर पर बुधवार को मोमबत्तियां जलाने के लिए कहा था।
डॉक्टरों की संस्था ने यह चेतावनी भी दी थी कि अगर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की तो वे ‘काला दिवस’ मनाएंगे और देश में डॉक्टर 23 अप्रैल को काले बैज पहनकर काम करेंगे।
बयान में कहा गया है, ‘‘आईएमए ने अत्यधिक उकसावे के बावजूद संयम और धैर्य बरता । डॉक्टरों से गाली गलौज की गई, उनकी पिटाई की गई, उन्हें प्रवेश तथा रहने से रोका गया। दाह संस्कार में बाधा अंतिम चीज है जिसे आईएमए को सहन करना पड़ा।’’
उसने कहा, ‘‘अगर मरने के बाद भी गरिमा नहीं दी जाती है तो हमारा संयम तथा धैर्य बेमायने हो जाता है।’’
आईएमए ने मंगलवार को कहा था, ‘‘हम एक अध्यादेश के जरिए डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों तथा अस्पतालों पर हिंसा के खिलाफ विशेष केंद्रीय कानून की मांग करते हैं।’’
दरअसल, कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 22, 2020 03:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

