देश की खबरें | कोटा में वन्यजीवों के अवैध व्यापार का पर्दाफाश, पांच लोग गिरफ्तार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान के कोटा में पशुओं के अंगों के अवैध व्यापार में शामिल होने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से भारी मात्रा में 'मॉनिटर छिपकली' के जननांग, हिरण के सींग और सियार की खाल बरामद की गई है। वन विभाग के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

कोटा, 12 सितंबर राजस्थान के कोटा में पशुओं के अंगों के अवैध व्यापार में शामिल होने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से भारी मात्रा में 'मॉनिटर छिपकली' के जननांग, हिरण के सींग और सियार की खाल बरामद की गई है। वन विभाग के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि नयी दिल्ली स्थित वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) से मिली जानकारी के आधार पर कोटा के घंटाघर और गुमानपुरा इलाकों में चार दुकानों में छापेमारी की गई।

उन्होंने बताया कि इन दुकानों में मॉनिटर छिपकलियों के जननांग, कछुए के अंग, हिरण के सींग और सियार की खाल समेत अवैध वन्यजीव उत्पाद बरामद किए गए और बाद में उन्हें जब्त कर लिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि अभेड़ा जैविक उद्यान के क्षेत्रीय वन कार्यालय के दलों ने इन दुकानों में छापेमारी की थी।

पांचों आरोपियों को बृहस्पतिवार को अदालत में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया गया।

उन्होंने बताया कि जिन दुकानों पर छापेमारी की गई वे धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त सामग्री की आड़ में पशुओं के अंग बेचते थे।

कोटा वन्यजीव के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) अनुराग कुमार भटनागर ने बताया कि डब्ल्यूसीसीबी के कर्मचारी दुकानों पर जंगली जानवरों के अंगों की बिक्री पर नजर रख रहे थे। उन्होंने बुधवार को वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद 15 सदस्यीय दल ने इन दुकानों में छापेमारी की।

उन्होंने बताया कि पांचों व्यापारियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 39, 49 (बी) और 50 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

भटनागर ने बताया कि इस मामले में एक अन्य व्यापारी से पूछताछ की गई लेकिन उसकी दुकान से कोई पशु अंग नहीं मिला है।

वन अधिकारियों ने जनता से अपील करते हुए कहा कि अगर उनके पास वन्यजीव का कोई भी अंग मौजूद है और उन्हें कानूनी सजा की जानकारी नहीं है तो वे तुरंत उस अंग को वन विभाग को सौंप दें।

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