देश की खबरें | वक्फ संपत्तियों पर अवैध निर्माण जोरों पर, उचित निगरानी की आवश्यकता : दिल्ली उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि विवादित वक्फ संपत्तियों पर अनधिकृत निर्माण जोर-शोर से हो रहे हैं और कोई भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

अदालत ने इस मामले में उचित निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया।

उच्च न्यायालय ने 123 संपत्तियों के विवाद से संबंधित मुद्दे पर गौर किया और कहा कि उनमें से कुछ दिल्ली में बहुत ही आकर्षक संपत्तियां हैं और शहर के केंद्र में स्थित हैं।

दिल्ली वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों पर अपना दावा करता है जबकि केंद्र ने उन्हें बोर्ड की सूची से बाहर कर दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने अपने द्वारा निपटाए गए मामलों में से एक का उल्लेख किया, जिसमें निजामुद्दीन में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्शायी गई संपत्ति को कई बार बेचा गया था, जिसके बाद बिना किसी अनुमति के उस पर एक होटल का निर्माण किया गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘जब हमने अधिकारियों से पूछा कि वे क्या कर रहे हैं और यह कैसे हुआ? हमें बताया गया कि वक्फ बोर्ड और डीडीए के बीच विवाद चल रहा है कि संपत्ति किसकी है। इस विवाद में, कोई भी संपत्तियों की देखभाल नहीं कर रहा है और उन पर अतिक्रमण किया गया है।’’

अदालत ने कहा कि कोई भी संपत्तियों की देखभाल नहीं कर रहा है और किसी को इसकी निगरानी करनी होगी।

अदालत की मौखिक टिप्पणियां उस याचिका पर सुनवाई करते हुए आईं, जिसमें दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव (गृह) अश्विनी कुमार को दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रशासक के पद से हटाने का अनुरोध किया गया था और उन पर वक्फ संपत्तियों के हित के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया था।

अदालत को सूचित किया गया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रशासक की नियुक्ति को चुनौती देने वाली समान अनुरोध वाली एक याचिका एकल न्यायाधीश के समक्ष लंबित थी, जिन्होंने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, इस पर खंडपीठ ने प्रशासन के वकील से इस मुद्दे पर निर्देश लेने को कहा।

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई आठ मई के लिए सूचीबद्ध की।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)