देश की खबरें | आईआईटी-गुवाहाटी ने कैंसर के मरीजों के लिये कम दुष्प्रभाव वाली कीमो रणनीति विकसित की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक कैंसर रोगी की संक्रमित कोशिकाओं तक सीधे कीमोथेरेपी दवाओं को पहुंचाने के लिए एक नई रणनीति विकसित की है जिससे दुष्प्रभावों (साइड इफेक्ट) में काफी कमी आई है।

गुवाहाटी, 26 सितंबर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक कैंसर रोगी की संक्रमित कोशिकाओं तक सीधे कीमोथेरेपी दवाओं को पहुंचाने के लिए एक नई रणनीति विकसित की है जिससे दुष्प्रभावों (साइड इफेक्ट) में काफी कमी आई है।

इसकी जानकारी देते हुए रसायन विभाग के प्रोफेसर देबाशीष मन्ना ने कहा कि कीमोथेरेपी की दवाओं के विकास में शोधकर्ताओं की दो जरूरतें थीं - यह कैंसर कोशिकाओं पर लक्षित हो और जब भी आवश्यकता हो, बाहरी तौर पर दी जानी चाहिए।

आईआईटी-गुवाहाटी ने सोमवार को एक बयान में कहा, “कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली मौजूदा दवाओं के साथ समस्या यह है कि वे कैंसरकारी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने के साथ ही शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती हैं, जिसके कई अवांछित दुष्प्रभाव भी होते हैं।”

इसमें कहा गया कि वास्तव में, यह माना जाता है कि कैंसर से जितनी मौत होती हैं उतनी ही जान कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों के कारण जाती हैं।

बयान में कहा गया, “कीमोथेरेपी की दवाओं की विषाक्तता की कमियों को दूर करने के लिए दुनिया भर में शोध किया जा रहा है। जिन कुछ रणनीतियों का पता लगाया जा रहा है उनमें दवाओं का लक्ष्य-केंद्रित वितरण और कैंसर कोशिकाओं और ऊतकों को उचित दवा की खुराक की मांग आधारित आपूर्ति शामिल है।”

बयान में कहा गया है कि आईआईटी-गुवाहाटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित अणु, दवा को केंद्रित रखने के लिए कैप्सूल के रूप में खुद को इकट्ठा करते हैं, और उसके बाद केवल कैंसर कोशिकाओं से जुड़ जाते हैं।

इसमें कहा गया कि जब इन पर इंफ्रारेड प्रकाश डाला जाता है तो इनका खोल टूट जाता है और कैप्सूल में भरी दवा कैंसरकारी कोशिकाओं में पहुंच जाती है। आईआईटी-गुवाहाटी के वैज्ञानिक मानते हैं कि उनके दृष्टिकोण से कीमोथेरेपी के लिए दवा वाहकों की प्रभावशीलता बढ़ेगी और इसके दुष्प्रभाव नगण्य होंगे।

शोध पत्रों का मन्ना ने अपने शोधार्थियों शुभाशीष डे, अंजलि पटेल और बिस्वा मोहन प्रुस्ति के साथ सह-लेखन किया है।

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