नयी दिल्ली, 16 फरवरी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के अनुसंधानकर्ता कोविड-19 रोधी एक नए टीके पर काम कर रहे हैं जो वर्तमान में स्वीकृत टीके लगाए जाने के बाद कुछ व्यक्तियों में देखी गई रक्त के थक्के जमने जैसी समस्या के जोखिम को कम करेगा। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि "अगली पीढ़ी" का टीका वर्तमान में परीक्षण के चरण में है।
सेंटर फॉर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर जयंत भट्टाचार्य ने कहा, "कोविड-19 के प्रकोप की शुरुआत के बाद से, दुनिया भर के वैज्ञानिक प्रभावी टीके विकसित करने के लिए बीमारी और संबंधित महामारी विज्ञान का अध्ययन कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि एक ऐसा टीका घातक कोरोना वायरस से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगा जो रक्त के थक्के जमने जैसे दुष्प्रभाव को दूर कर सके और एक टिकाऊ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रदान कर सके।
भट्टाचार्य के अनुसार, वर्तमान टीकों में एंटीजन, सिंथेटिक सामग्री या एडेनोवायरस जैसी चीजों का उपयोग किया जाता है, जबकि आईआईटी दिल्ली के अनुसंधानकर्ताओं ने ‘नैनो-वैक्सीन’ विकसित करने के लिए शरीर की खुद की प्रतिरक्षा कोशिकाओं का उपयोग किया है।
उन्होंने कहा कि आईआईटी के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा विकसित किए गए टीके के वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे टीकों की तुलना में कई लाभ हो सकते हैं, उदाहरण के लिए यह कोविड रोधी टीकाकरण के बाद रक्त के थक्के जमने के जोखिम को कम करेगा तथा अगला संक्रमण रोकने के लिए कोशिकाओं की स्मृति में वृद्धि कर कोरोना वायरस के खिलाफ टिकाऊ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रदान करेगा।
भट्टाचार्य ने कहा कि टीकाकरण से संबंधित इस दृष्टिकोण का उपयोग डेंगू जैसे विभिन्न अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए किया जा सकता है।
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