देश की खबरें | अगर हम सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल पर सहमत नहीं हैं तो हम आतंकवाद पर अपना पक्ष कैसे रख सकते हैं : चव्हाण

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मुंबई, 19 मई कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने सोमवार को कहा कि केंद्र को ऑपरेशन सिंदूर के बाद सर्वदलीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों को विदेश भेजने के मुद्दे को अधिक कुशलता से संभालना चाहिए था और इस मामले पर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है।

आतंकवाद को कत्तई बर्दाश्त नहीं करने का भारत का संदेश देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार इस महीने के अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों सहित प्रमुख साझेदार देशों में सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेज रही है।

चव्हाण ने यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि संसद को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करना चाहिए कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को भारत वापस लेगा।

कांग्रेस नेता चव्हाण ने कहा कि केंद्र सरकार को आतंकवाद से निपटने और पाकिस्तान को बेनकाब करने के भारत के वैश्विक प्रयासों के मुद्दे को बेहतर ढंग से संभालना चाहिए था।

उन्होंने कहा, ‘‘(सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में) सदस्य बनाने को लेकर असहमति के कारण विवाद पैदा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर हम इस बात पर सहमत नहीं हैं कि इन प्रतिनिधिमंडलों में कौन-कौन शामिल होना चाहिए, तो हम दुनिया के सामने (आतंकवाद पर) अपना पक्ष कैसे रख सकते हैं?’’

चव्हाण ने बताया कि परंपरा के अनुसार, अलग-अलग राजनीतिक दलों के सचेतक संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के नाम प्रस्तुत करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा मामला संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से संबंधित नहीं है, बल्कि सरकारी प्रतिनिधिमंडलों से संबंधित है। सरकार व्यक्तिगत रूप से नेताओं से पूछ सकती है कि क्या वे ऐसे प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा बनना चाहते हैं। यह सरकार का विशेषाधिकार है। (कांग्रेस) पार्टी से नाम मांगने और फिर उन्हें प्रतिनिधिमंडलों में शामिल नहीं करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। यह पार्टी का अपमान करने जैसा है।"

चव्हाण विदेश जाने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक का नेतृत्व करने के लिए कांग्रेस की ओर से भेजे गये नामों की अनदेखी कर पार्टी सांसद शशि थरूर का चयन करने के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस अपनी मांग पर अड़ी हुई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करें और पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और भारत एवं पाकिस्तान के बीच गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए बनी सहमति पर चर्चा के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘संसद को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने दीजिये कि पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) को भारत वापस लेगा और आतंकवाद को खत्म करने के देश के संकल्प की घोषणा हो। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार को लगता है कि विपक्षी (दल के) सांसद देशभक्त नहीं हैं।’’

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