देश की खबरें | ईदगाह मैदान मुद्दा: चामराजपेट बंद पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
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बेंगलुरु, 12 जुलाई बेंगलुरु के चामराजपेट में 2.10 एकड़ के ‘ईदगाह मैदान’ को नगर निकाय की संपत्ति घोषित करने और इसे खेल के मैदान के रूप में संरक्षित करने की मांग को लेकर नागरिक संस्थाओं और अन्य संगठनों द्वारा मंगलवार को आहूत बंद को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।
केवल कुछ दुकानें जैसे चिकित्सा और अन्य आपातकालीन सेवाओं में शामिल दुकानों को छोड़कर ईदगाह मैदान के आस-पास की अधिकांश दुकानें बंद रहीं। बंद दुकानों के दरवाजे या शटर पर बंद का समर्थन करने वाला एक स्टिकर लगा था।
हालांकि, ईदगाह मैदान से थोड़ा दूर चामराजपेट के अन्य इलाकों में दुकानें और प्रतिष्ठान सामान्य रूप से काम करते रहे और सड़क पर वाहनों की आवाजाही भी सामान्य रही। आसपास के कई स्कूल और शिक्षण संस्थान बंद रहे।
किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कुछ लोगों ने जबरन दुकानें बंद कराने का प्रयास किया तो पुलिस ने बीच बचाव किया।
ईदगाह मैदान को नगर निकाय बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) की संपत्ति घोषित करने और इसे कर्नाटक राज्य वक्फ बोर्ड को नहीं दिए जाने की मांग को लेकर ‘चामराजपेट बंद’ का आह्वान ‘चामराजपेट नागरीकारा ओक्कुटा वेदिके’ ने किया था।
वे वहां खेल के मैदान को बचाने, वहां हिंदू और राष्ट्रीय त्योहारों को मनाने की अनुमति देने और इसका नाम बदलकर मैसूर के अंतिम महाराजा जयचमराजा वाडियार के नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं।
हाल में, बीबीएमपी ने शुरू में ईदगाह मैदान के स्वामित्व का दावा किया था, लेकिन बाद में उसने कहा कि यह संपत्ति उसकी नहीं है। इसने कहा है कि स्वामित्व को लेकर अस्पष्टता 1974 के शहर सर्वेक्षण रिकॉर्ड के कारण थी।
बीबीएमपी के मुख्य आयुक्त तुषार गिरि नाथ ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने 1964 में संपत्ति पर हमारे दावे को खारिज कर दिया था। बाद के वर्षों के शहर सर्वेक्षण रिकॉर्ड बीबीएमपी को भूमि के धारक के रूप में दिखाते हैं। हालांकि, बीबीएमपी के पास संपत्ति का स्वामित्व नहीं है।’’
संपत्ति पर बीबीएमपी के प्रारंभिक दावे को मुस्लिम निकायों ने यह कहते हुए चुनौती दी थी कि ईदगाह एक राजपत्रित वक्फ संपत्ति है।
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