जरुरी जानकारी | कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रिया से संबंधित संशोधनों को आईबीबीआई ने अधिसूचित किया
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नयी दिल्ली, दो जून आईबीबीआई ने कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले नियमों में संशोधनों को अधिसूचित कर दिया है, जिसका उद्देश्य प्रक्रियाओं को कारगर बनाना, लेनदारों के हितों की रक्षा करना और समाधान प्रक्रियाओं में अधिक निवेशक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने 26 मई को कॉरपोरेट इकाइयों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया से संबंधित चौथे संशोधन विनियम, 2025 को अधिसूचित किया।
इस संशोधन के महत्वपूर्ण बदलावों में कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) की मंजूरी के साथ समाधान पेशेवरों को न केवल पूरे कॉरपोरेट देनदार के लिए बल्कि व्यक्तिगत परिसंपत्तियों या दोनों के संयोजन के लिए भी अभिरुचि पत्र आमंत्रित करने की अनुमति देना शामिल है।
आईबीबीआई ने कहा कि दोनों समूहों के लिए आवेदनों को सक्षम बनाने से समाधान प्रक्रिया समयसीमा में कमी ला सकती है, व्यवहार्य खंडों में मूल्यह्रास को रोक सकती है और व्यापक निवेशक भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकती है।
विनियमों ने चरणों में निष्पादित समाधान योजनाओं के तहत भुगतान के लिए रूपरेखा को भी संशोधित किया है। ऐसे मामलों में, वित्तीय लेनदार जो समाधान योजना का समर्थन नहीं करते थे, उन्हें अब कम से कम आनुपातिक आधार पर और पक्ष में मतदान करने वालों से पहले भुगतान प्राप्त होगा।
बोर्ड ने कहा कि यह दृष्टिकोण चरणबद्ध कार्यान्वयन की व्यावहारिक बाधाओं के साथ असहमत लेनदारों के वैध अधिकारों को संतुलित करता है।
इसके साथ ही कर्जदाताओं की समिति समाधान पेशेवरों को यह निर्देश दे सकती है कि अंतरिम वित्त प्रदाता मताधिकार के बिना पर्यवेक्षक के रूप में बैठकों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किए जाएं।
आईबीबीआई के मुताबिक, इस संशोधन का उद्देश्य अंतरिम वित्त प्रदाताओं को कॉरपोरेट देनदार की परिचालन स्थिति की बेहतर समझ प्रदान करना है।
संशोधित मानदंड समाधान पेशेवरों को सभी योजनाओं को प्रासंगिक विवरणों के साथ सीओसी के समक्ष रखने का भी आदेश देते हैं। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि सीओसी के पास निर्णय लेने के लिए व्यापक जानकारी तक पहुंच है।
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