देश की खबरें | विधि विशेषज्ञों से विमर्श कर वन्नियार समुदाय के लिए 10.5% आरक्षण सुनिश्चित करुंगा : स्टालिन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में कहा कि जिस तरह राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया, वैसे ही राज्य सरकार वन्नियारों (अति पिछड़ा वर्ग)के लिए 10.5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के वास्ते कानूनी विशेषज्ञों से मशविरा करेगी।

चेन्नई, सात अप्रैल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में कहा कि जिस तरह राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया, वैसे ही राज्य सरकार वन्नियारों (अति पिछड़ा वर्ग)के लिए 10.5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के वास्ते कानूनी विशेषज्ञों से मशविरा करेगी।

इस बहस में पड़ने से इनकार करते हुए कि वन्नियार समुदाय को 10.5 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध कराने का कानून ‘अस्थायी’ है, उन्होंने कहा, ‘‘यह राज्य के सामाजिक न्याय एवं विशेष आरक्षण से संबंधित एक मुद्दा है।’’

मुख्यमंत्री ने अन्नाद्रमुक, वन्नियार बहुल पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और तमिजगा वजुरिमई काची (टीवीके) की ओर से लाये गये विशेष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा, ‘‘वन्नियार के लिए आरक्षण का जहां तक संबंध है, सरकार कानूनी विशेषज्ञों के साथ विमर्श करेगी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेगी।’’

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य विधायिका और सरकार को (आंतरिक) आरक्षण से संबंधित कानून बनाने का अधिकार है।

उन्होंने पूर्ववर्ती अन्नाद्रमुक सरकार पर आनन-फानन में आरक्षण कानून लागू करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि यद्यपि इसके लिए सिफारिश 2012 में की गयी थी लेकिन इस कानून को 2021 में लागू किया गया और वह भी राज्य विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से आधा घंटा पहले।

वहीं, सदन के बाहर अन्नाद्रमुक के नेता के. पलानीस्वामी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने 2021 में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान आनन-फानन में कानून लागू करने का निराधार आरोप लगाया है।

उच्चतम न्यायालय ने गत 31 मार्च को वन्नियार समुदाय को 10.5 प्रतिशत आरक्षण को निरस्त कर दिया था और कहा था कि इस समुदाय के लिए विशेष रूप से आरक्षण दिये जाने को लेकर कोई पुख्ता आधार नहीं दिया गया है।

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