देश की खबरें | ‘भारत समिट’ में वैश्विक मुद्दों पर हैदराबाद घोषणा पत्र को मंजूरी दी गई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हैदराबाद में आयोजित दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन ‘‘भारत समिट 2025’’ में शनिवार को ‘हैदराबाद संकल्प: वैश्विक न्याय प्रदान करना’ नाम से 44 सूत्री घोषणापत्र को अपनाया गया, जिसमें स्वतंत्रता, समानता, न्याय और एकजुटता के मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई गई।

हैदराबाद, 26 अप्रैल हैदराबाद में आयोजित दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन ‘‘भारत समिट 2025’’ में शनिवार को ‘हैदराबाद संकल्प: वैश्विक न्याय प्रदान करना’ नाम से 44 सूत्री घोषणापत्र को अपनाया गया, जिसमें स्वतंत्रता, समानता, न्याय और एकजुटता के मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई गई।

प्रस्ताव में सभी प्रकार के आतंकवाद के साथ हिंसा का समर्थन करने वाले राष्ट्रों की निंदा की गई और दुनिया भर में उन प्रगतिशील आंदोलनों के साथ खड़े होने का संकल्प लिया गया जिन्हें दबाया जा रहा है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दूसरे दिन मुख्य भाषण दिया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि सामाजिक और पारंपरिक मीडिया को प्रभावित किया जा रहा है तथा कार्यकर्ताओं और असहमति जताने वालों की निगरानी की जा रही है, जबकि कानून के शासन और सार्वजनिक जवाबदेही को कमजोर किया जा रहा है, जिससे अनियंत्रित शक्ति और भ्रष्टाचार के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘हम निरंतर हो रहे अन्याय को चिह्नित करते हैं, विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ को प्रभावित करने वाले अन्याय को, एवं एक ऐसी विश्व व्यवस्था को नया आकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो समतापूर्ण, समावेशी और उत्तरदायी हो।’’

‘ग्लोबल साउथ’ का आशय दुनिया के कम संपन्न या आर्थिक रूप से कमजोर देशों से है।

प्रस्ताव में कहा गया कि वह सभी प्रकार के दमन, हिंसा, औपनिवेशिक कदमों का विरोध करता है, जिसमें एकतरफा बलपूर्वक उपाय, प्रतिबंध और शुल्क शामिल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं-चाहे वे एक राष्ट्र द्वारा दूसरे के खिलाफ या किसी भी व्यक्ति द्वारा दूसरे के खिलाफ किए गए हों।

प्रस्ताव में शांति के साथ आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक स्थिरता पर जोर दिया गया है।

प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार करके और अंतरराष्ट्रीय कानून के पूर्ण सम्मान के साथ संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को मजबूत करके बहुपक्षीय संस्थाओं का लोकतंत्रीकरण करने की मांग की गई है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक नया ढांचा तैयार करने की मांग की गई है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को बहाल करेगा और ‘ग्लोबल साउथ’ तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक न्यायसंगत प्रतिनिधित्व प्रदान करेगा।

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