देश की खबरें | एचआईवी पॉजिटिव बालिकाओं को सामाजिक संस्था से शासकीय बाल गृह भेजा गया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक सामाजिक संस्था से 14 एचआईवी पॉजिटिव बालिकाओं को अलग-अलग शासकीय बाल गृह में भेजा गया है। सामाजिक संस्था ने आरोप लगाया है कि बालिकाओं को वहां से बलपूर्वक निकाला गया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

बिलासपुर, 17 अगस्त छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक सामाजिक संस्था से 14 एचआईवी पॉजिटिव बालिकाओं को अलग-अलग शासकीय बाल गृह में भेजा गया है। सामाजिक संस्था ने आरोप लगाया है कि बालिकाओं को वहां से बलपूर्वक निकाला गया है।

बिलासपुर जिले के पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि शहर के करीब घुरू गांव में संचालित सामाजिक संस्था 'अवर होम' में बिलासपुर और अन्य जिलों की एचआईवी पॉजिटिव 14 बालिकाओं को रखा गया था। उन्होंने कहा कि आश्रय संस्था को चलाने के लिए आवश्यक मानक पूरे न होने तथा पंजीयन आदि की अनियमितता के कारण बालिकाओं को उनके जिले के शासकीय बाल गृह (बालिका) में स्थानांतरित कर दिया गया है।

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अग्रवाल ने बताया कि स्थानांतरण के दौरान पुलिस और बाल कल्याण समिति तथा महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा। माहौल को शांत करने के लिए पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रही सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया है।

बिलासपुर जिले के महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह ने बताया कि 'अवर होम' में पांच जिलों की 14 एचआईवी पॉजिटिव बालिकाएं मौजूद थी। जिनमें चार बिलासपुर से, एक रायगढ़, तीन जांजगीर—चांपा, तीन कवर्धा और तीन रायपुर जिले की बालिकाएं शामिल हैं।

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सिंह ने बताया कि संस्था आवश्यक मानक पूरे नहीं कर रही थी इसलिए सभी जिले की बाल संरक्षण इकाइयों ने उन्हें करीब एक माह पूर्व नोटिस जारी कर अपने जिले की बालिकाओं को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। उन्होंने बताया कि संस्था 'अवर होम' के संचालक इस आदेश का पालन नहीं कर रहे थे इसलिए सोमवार को पांचों सम्बंधित जिलों के महिला बाल विकास विभाग तथा बाल कल्याण समिति के अधिकारी संस्था में पहुंचे थे।

इधर 'अवर होम' के संचालक संजीव खट्टर ने बताया कि अवर होम संस्था ने बालक कल्याण समिति, बिलासपुर के विरुद्ध उच्च न्यायालय में पिछले वर्ष एक याचिका दायर की थी जिसमें बालक कल्याण समिति द्वारा उनकी संस्था से बालिकाओं के स्थानान्तरण के फैसले को चुनौती दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि उनकी संस्था सारे आवश्यक मानक पूरे करती है यदि इसमें कोई कमी पाई जाती है तब वह उसे पूरा करेंगे। साथ ही बिलासपुर के जिलाधिकारी से आवश्यक जांच कराने की मांग भी की गई थी।

खट्टर ने बताया कि आज बिना सूचना दिए भारी पुलिस बल के साथ महिला बाल विकास विभाग की टीम उनकी संस्था में आ धमकी और बलपूर्वक बालिकाओं को ले गई।

उन्होंने कहा कि बच्चों को खींच-खींचकर निकाला गया तथा कुछ बच्चियां आश्रम से निकलकर भागने लगीं तब उन्हें दौड़ाकर पुलिस ने पकड़ लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक कार्यकर्त्ता प्रियंका शुक्ला के साथ भी मारपीट की गई।

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