गुवाहाटी, दो दिसंबर पूर्वोत्तर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक प्रमुख चेहरा, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा चुनाव प्रचार के लिए पार्टी के एक नये ‘पोस्टर बॉय’ के रूप में उभरे हैं जो सुदूर गुजरात और दिल्ली में इस क्षेत्र से पहले ‘स्टार प्रचारक’ के रूप में लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
चाहे वह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निरस्त करना हो, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करना हो, पीएफआई पर प्रतिबंध हो, राम जन्मभूमि मंदिर का मुद्दा हो, हाल में एक व्यक्ति द्वारा अपनी ‘लिव-इन पार्टनर’ की हत्या का मामला हो या कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर निशाना साधना हो, सरमा ने चुनावी राज्य गुजरात में दक्षिणपंथी पार्टी के प्रमुख एजेंडे को मुखरता से आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार मवेशी संरक्षण अधिनियम को पारित करना, अल्पसंख्यक जनसंख्या वृद्धि पर लगाम लगाने, सरकारी मदरसों को बंद करने और उन्हें सामान्य स्कूलों में बदलने के लिए विशिष्ट नीतिगत उपायों के आह्वान के जरिये वह ध्रुवीकरण की राजनीति के केंद्र में आये हैं।
हालांकि उन्होंने खुद को ‘स्टार प्रचारक’ बताये जाने से इनकार करते हुए कहा कि वह ‘‘कोई स्टार नहीं हैं, बल्कि पार्टी के एक साधारण ‘कार्यकर्ता’ हैं और गुजरात के नेता भी चुनाव के दौरान असम जाते हैं।’’
शर्मा ने गुजरात में एक सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार किया। उन्होंने प्रचार के दौरान अपने हमले को कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर केंद्रित रखा। अपने प्रत्येक प्रचार अभियान में, चाहे गुजरात हो या दिल्ली, उन्होंने एक विशेष समुदाय के लाभ के लिए ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ करने के वास्ते कांग्रेस पर निशाना साधा है।
‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी द्वारा दाढ़ी बढ़ाये जाने पर शर्मा ने यहां तक कह दिया कि ‘‘राहुल गांधी अपनी दाढ़ी में, इराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन जैसे दिखते हैं।’’
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार से जब शर्मा के कांग्रेस और राहुल गांधी पर लगातार हमले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए अपने आकाओं को खुश करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ऐसे समय में ध्रुवीकरण की राजनीति का सहारा ले रही है जब युवा और लोग बेरोजगारी और महंगाई की बात कर रहे हैं।’’
राजनीतिक विश्लेषक परेश मालाकार ने बताया कि उन्होंने भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे के प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला, लेकिन साथ ही कहा कि उनकी टिप्पणियों को ‘गैर-जिम्मेदार’ भी माना जा सकता है।
असम जातीय परिषद (एजेपी) के महासचिव जगदीश भुइयां ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘गुजरात में इतने सालों तक सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा विकास की बात नहीं कर रही है, बल्कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में लगी हुई है। शर्मा लोगों को भड़काने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।’’
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