नाहन (हिमाचल प्रदेश), 14 अगस्त हिमाचल प्रदेश के ट्रांस-गिरि (गिरि नदी के दूसरी ओर का इलाका) क्षेत्र में रहने वाले हाटी समुदाय के लोगों ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की उनकी 55 साल पुरानी मांग को स्वीकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया।
समुदाय के सदस्यों ने रविवार को लगभग 400 गांवों में ‘धन्यवाद देने के लिए’ बैठकें आयोजित कीं। गांव के नेताओं ने समुदाय के सदस्यों को जनजातीय दर्जे के लाभों की जानकारी दी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पांच अगस्त को हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक 2022 को मंजूरी दे दी थी।
समुदाय के एक नेता ने बताया कि 400 से अधिक गांवों वाली 154 पंचायतों के लगभग तीन लाख लोगों को आदिवासी दर्जे से लाभ हुआ है और ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में बैठकों में भाग लिया।
सेंट्रल हाटी समिति के अध्यक्ष आमीन चंद कमल ने सोमवार को कहा, ‘‘पांच दशकों से अधिक समय से चला आ रहा शांतिपूर्ण आंदोलन मांग को माने जाने के साथ समाप्त हुआ। इससे समुदाय के लोगों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं में काफी उत्साह है।’’
समुदाय के नेताओं ने बताया कि आदिवासी दर्जा मिलने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए 900 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने मोदी को धन्यवाद देते हुए हस्ताक्षर भी एकत्र किए, जिन्हें ऑनलाइन तरीके प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा।
हाटी समिति का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से भी मुलाकात करेगा।
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