देश की खबरें | उच्च स्तरीय समूह अफगानिस्तान के हालात की निगरानी कर रहा : सूत्र

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का एक उच्च स्तरीय समूह अफगानिस्तान से 20 साल बाद अमेरिकी सेना की वापसी के मद्देनजर वहां भारत की तत्काल प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

नयी दिल्ली, 31 अगस्त विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का एक उच्च स्तरीय समूह अफगानिस्तान से 20 साल बाद अमेरिकी सेना की वापसी के मद्देनजर वहां भारत की तत्काल प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पिछले कुछ दिनों से समूह की नियमित बैठक हो रही है। भारत की तात्कालिक प्राथमिकताएं अफगानिस्तान में अभी भी फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी, नयी दिल्ली का साथ देने वाले अफगान नागरिकों को लाना और यह सुनिश्चित करना है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं किया जाए।

एक सूत्र ने बताया, ‘‘अफगानिस्तान में उभरती स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में निर्देश दिया कि एक उच्च स्तरीय समूह भारत की तत्काल प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करें। इस समूह में विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं हो, यह सुनिश्चित करने और वहां फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी, अफगान नागरिकों (विशेष रूप से अल्पसंख्यकों) की भारत यात्रा से संबंधित मुद्दों पर गौर किया जा रहा है।’’ सूत्रों ने यह भी कहा कि समूह अफगानिस्तान में जमीनी हालात और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं पर नजर रख रहा है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा पारित प्रस्ताव भी शामिल है।

अमेरिका ने दो दशकों से जारी जंग को खत्म करते हुए अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है। मंगलवार सुबह अंतिम अमेरिकी उड़ान के साथ तालिबान ने काबुल के हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

भारत की अध्यक्षता में अफगानिस्तान को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा जारी प्रस्ताव ''स्पष्ट रूप से'' यह बताता है कि अफगान क्षेत्र का उपयोग किसी भी राष्ट्र को धमकाने, हमला करने, आतंकवादियों को शरण देने या प्रशिक्षित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

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