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उच्च न्यायालय ने बौद्धिक संपदा अधिकार प्राधिकरण के नोटिस पर रोक लगाई

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (सजीपीडीटीएम) द्वारा चार मई को जारी सार्वजनिक नोटिस पर रोक लगाते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 23 मार्च को जारी आदेश में निर्देश दिया था कि सभी मामलों में परिसीमा अवधि को अगले आदेश तक बढ़ाया जाता है और शीर्ष अदालत का यह निर्देश 15 मार्च से प्रभावी है।

उच्च न्यायालय ने बौद्धिक संपदा अधिकार प्राधिकरण के नोटिस पर रोक लगाई
जमात

नयी दिल्ली, 12 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बौद्धिक संपदा अधिकार प्राधिकरण की ओर से जारी परिसीमा अवधि को लेकर जारी सार्वजनिक नोटिस के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर वकीलों और वादियों को उसके समक्ष लंबित मामलों में 18 मई तक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने को कहा था।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (सजीपीडीटीएम) द्वारा चार मई को जारी सार्वजनिक नोटिस पर रोक लगाते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 23 मार्च को जारी आदेश में निर्देश दिया था कि सभी मामलों में परिसीमा अवधि को अगले आदेश तक बढ़ाया जाता है और शीर्ष अदालत का यह निर्देश 15 मार्च से प्रभावी है।

न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी अदालत, न्यायाधिकरण या कोई भी प्राधिकरण उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत काम नहीं कर सकता।

उल्लेखनीय है कि सीजीपीडीटीएम ने चार मई के नोटिस में कहा था कि परिसीमा अवधि 25 मार्च को जब लॉकडाउन लागू हुआ था, तब से शुरू होगी और 17 मई को समाप्त होगी, जबतक कि इसे बढ़ाया नहीं जाता।

बौद्धिक संपत्ति अटॉर्नी एसोसिएशन (आईपीएए) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर एम लाल और अधिवक्ता अर्चना सहदेव ने नोटिस को चुनौती देते हुए कहा कि यह उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत है।

उन्होंने नोटिस को चुनौती देते हुए कहा कि इससे वादियों और वकीलों पर बहुत अधिक बोझ पड़ेगा क्योंकि फाइलों को हासिल करना और दस्तावेजी कार्यवाही को 18 मई तक पूरा करना मुश्किल है, क्योंकि 17 मई को लॉकडाउन समाप्त हो रहा है।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 12, 2020 10:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).