देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की अर्जी पर पूर्व न्यायाधीश कुद्दूसी का रुख जानना चाहा

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नयी दिल्ली, 13 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आई एम कुद्दूसी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की एक अर्जी पर शुक्रवार को उनका रुख जानना चाहा। मामले में कुछ जानकारी मांगने के सीबीआई के नोटिस को रद्द करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए जांच एजेंसी ने अर्जी दाखिल की है।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ सीबीआई की अर्जी पर नोटिस जारी किया। निचली अदालत का आदेश अप्रैल में जारी किया गया था। उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत जारी नोटिस में जांच एजेंसी ने कुद्दूसी से उनके बैंक खातों के बारे में, उनके कर्मचारियों आदि के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसे इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि यह स्व-दोषारोपण के समान है।

सीबीआई की ओर से वकील निखिल गोयल ने कहा, ‘‘विभिन्न आरोपियों को नोटिस जारी किया गया। निचली अदालत ने अपने आदेश में उनके रुख (आत्म-दोषारोपण) को स्वीकार किया तथा धारा 91 के तहत नोटिस को रद्द कर दिया।’’

निचली अदालत के समक्ष अपने मामले में सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश और छह अन्य लोगों पर आपराधिक षड्यंत्र तथा भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

सीबीआई ने दावा किया है कि कुद्दूसी ने उच्चतम न्यायालय की सुनवाई वाले एक मामले में फैसले को प्रभावित करने का प्रयास किया। आरोप है कि सह-आरोपी बी पी यादव ने अपने प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को सरकार द्वारा 2017-18 और 2018-19 के लिए छात्रों के प्रवेश से रोके जाने के बाद उच्चतम न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया था।

सीबीआई का आरोप है कि मामले में उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हो रही थी तभी यादव ने कथित तौर पर कुद्दूसी और एक अन्य सह-आरोपी से संपर्क किया ताकि ‘उच्चस्तरीय पदाधिकारियों’ से मिलकर मामले को निपटाया जा सके।

यहां सीबीआई की एक अदालत ने नवंबर 2019 में मामले में आरोपी के तौर पर कुद्दूसी को तलब किया था। इससे पहले सीबीआई ने आरोपपत्र दायर किया था।

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