नयी दिल्ली, 21 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानव व्यवहार एवं सम्बद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) और भारतीय चिकित्सा परिषद से एक डॉक्टर की उस याचिका पर शुक्रवार को जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि संस्थान ने परास्नातक पाठ्यक्रम में ऐसे अभ्यर्थी को प्रवेश दिया था जिसकी रैंक कम थी।
डॉक्टर ने आरोप लगाया कि कानून और योग्यता के नियम का उल्लंघन करके दूसरे अभ्यर्थी को प्रवेश दिया गया।
न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने इस याचिका पर केन्द्र, चिकित्सा परामर्श समिति, भारतीय चिकित्सा परिषद, चिकित्सा सेवा संकाय और दिल्ली स्थित इहबास और उस अभ्यर्थी को नोटिस जारी किये जिसने पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश लिया था।
महिला याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर नंदराजोग ने कहा कि वह नीट परीक्षा में शामिल हुई और उन्होंने पूरे देश में 18786 रैंक प्राप्त की थी।
याचिकाकर्ता एक एमबीबीएस हैं और वह एमडी (मनोचिकित्सा) करना चाहती थीं।
याचिका में कहा गया है कि चिकित्सा सेवा संकाय और इहबास ने एमडी (मनोचिकित्सा) की रिक्ति के बारे में अभ्यर्थियों को सूचित नहीं किया था और उन्होंने दूसरे अभ्यर्थी का पक्ष लिया।
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