देश की खबरें | वेतन, पेंशन से वंचित एमसीडी कर्मचारियों की स्थिति पर उच्च न्यायालय ने दुख व्यक्त किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के कर्मियों की स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि उसे यह देखकर कष्ट होता है कि लोगों को अपने वेतन के लिए अदालत से संपर्क करना पड़ता है।
नयी दिल्ली, आठ जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के कर्मियों की स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि उसे यह देखकर कष्ट होता है कि लोगों को अपने वेतन के लिए अदालत से संपर्क करना पड़ता है।
अदालत ने कहा कि तीनों नगर निगम-उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम अपने संसाधनों में वृद्धि के लिए कदम उठाएं और इस संबंध में शपथपत्र दायर करें।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा, ‘‘जब लोग अपने वेतन के भुगतान के लिए हमारे पास आते हैं तो हमें दुख होता है, उनकी दुर्दशा की कल्पना कीजिए...हमें समूची स्थिति और अधिकारियों की निष्ठुरता को देखकर कष्ट होता है। जब हम कुछ करते हैं तो आप बिना सोचे प्रतिक्रिया करते हैं। यह हैरान करनेवाला है।’’
अदालत ने कहा कि नगर निगमों का काम कर्मियों को वेतन देने का ही नहीं, बल्कि शहर को विश्वस्तरीय बनाने, डेंगू, चिकुनगुनिया और मलेरिया जैसे मुद्दों को देखने का भी है।
इसने उल्लेख किया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अपने संसाधनों को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं और यहां तक कि महामारी की स्थिति में भी उसके राजस्व में वृद्धि हुई है।
पीठ ने दिल्ली सरकार को 10 दिन के भीतर उत्तरी दिल्ली नगर निगम को दूसरी और तीसरी तिमाही के लिए अनुदान सहायता और बुनियादी कर दायित्व के रूप में 293 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा जिससे कि वह एकदम ठीक तरह से वेतन और पेंशन का भुगतान कर सके।
इसने उल्लेख किया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कर्मियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को हालांकि वेतन और पेंशन का भुगतान हो चुका है, लेकिन अब भी काफी बकाया शेष है।
अदालत ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम को भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम की तर्ज पर अपने संसाधन बढ़ाने को कहा।
पीठ वेतन और पेंशन का भुगतान न होने संबंधी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
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