देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने पत्नी के साथ दिल्ली में रहने के लिए वायु सैनिक की याचिका खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को वायु सेना के एक कर्मी की राष्ट्रीय राजधानी में स्थानांतरण के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी के साथ रहने और सामान्य वैवाहिक जीवन जीने के लिये स्थानांतरण का अनुरोध किया था।

नयी दिल्ली, 26 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को वायु सेना के एक कर्मी की राष्ट्रीय राजधानी में स्थानांतरण के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी के साथ रहने और सामान्य वैवाहिक जीवन जीने के लिये स्थानांतरण का अनुरोध किया था।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने कहा कि प्रासंगिक स्थानांतरण नीति के अनुसार सामान्य पारिवारिक जीवन जीने के लिए पति और पत्नी को एक ही स्टेशन पर तैनात किया जा सकता है, लेकिन किसी सरकारी कर्मचारी को अपनी पसंद की पोस्टिंग का दावा करने का कोई निहित अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को सिर्फ इस आधार पर दिल्ली में पोस्टिंग का दावा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता है।

अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को अपनी पत्नी से मिलने में कोई बाधा नहीं है, क्योंकि वह हर साल 30 दिन आकस्मिक छुट्टी के अलावा सालाना 60 दिनों की छुट्टी का हकदार है।’’ अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार के एक संस्थान में काम करने वाली याचिकाकर्ता की पत्नी भी विभिन्न छुट्टियों की हकदार है।

पीठ ने कहा, ‘‘इस अदालत की राय है कि याचिकाकर्ता को अपनी पत्नी के साथ रहने के आधार पर दिल्ली में पोस्टिंग का दावा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।’’

शिलांग में तैनात याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने अक्टूबर 2019 में अपने परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी की, लेकिन वैवाहिक जीवन नहीं जी पाया क्योंकि वह अपनी पत्नी से मिलने के लिए बार-बार छुट्टी लेने में असमर्थ है। कुछ खास कारणों से उसकी पत्नी भी वहां स्थानांतरित नहीं हो सकती है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह 5-6 महीने में केवल एक बार अपनी पत्नी से मिल पाता है, जो अपने माता-पिता के घर में रहती है और उसका जीवन खराब हो गया है, क्योंकि उसके रिश्तेदार और माता-पिता तलाक के लिए आवेदन करने को लेकर दबाव बना रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्हें जबरदस्त मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है और प्रार्थना की कि उसे दिल्ली/राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तैनात किया जाए।

अदालत ने इस आधार पर मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया कि स्थानांतरण आदेश के लिए केवल तभी हस्तक्षेप किया जा सकता है जब यह किसी वैधानिक प्रावधान के विपरीत हो, एक अक्षम प्राधिकारी द्वारा दुर्भावनापूर्ण या अन्य वजहों से जारी किया गया है।

भारतीय वायु सेना ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उसकी पोस्टिंग/स्थानांतरण नीति मानव संसाधन के सर्वोत्तम इस्तेमाल के लिए है, और वायु सैनिक को उसकी पोस्टिंग प्रोफाइल को संतुलित करने के लिए सेवा की आवश्यकता के हिसाब से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है।

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