देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने जेल विभाग को हवारा के खिलाफ लंबित मामलों की अद्यतन सूची तैयार करने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जेल विभाग को जगतार सिंह हवारा के खिलाफ लंबित मामलों की एक अद्यतन सूची तैयार करने को कहा। हवारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या की साजिश रचने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को जेल विभाग को जगतार सिंह हवारा के खिलाफ लंबित मामलों की एक अद्यतन सूची तैयार करने को कहा। हवारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या की साजिश रचने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
हवारा ने उच्च न्यायालय का रूख कर जेल के रिकॉर्ड में उसके मामले के विवरण को अद्यतन करने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया था। उसका आरोप है कि उनकी निष्क्रियता उसे पैरोल, फरलो जैसे उसके कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने से रोक रही है।
जेल विभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली सरकार के स्थायी वकील (आपराधिक) राहुल मेहरा ने न्यायमूर्ति ए जे भंभानी के समक्ष कहा कि दिल्ली जेलों के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार हवारा के खिलाफ 37 मामले लंबित हैं।
मेहरा ने अधिवक्ता चैतन्य गोसाई के साथ कहा कि दिल्ली के बाहर विभिन्न अदालतों से जानकारी एकत्र करने के बाद उनकी मौजूदा स्थिति के साथ मामलों की सूची को मिलाने की पूरी कोशिश की जायेगी और इसके लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया है।
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न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसके अनुसार एक अद्यतन सूची तैयार की जाए और सुनवाई की अगली तारीख से पहले याचिकाकर्ता (हवारा) को दी जाये।’’
अदालत के समक्ष एक प्रति पेश की जायेगी और मामले को अगली सुनवाई के लिए 11 दिसम्बर को सूचीबद्ध किया गया।
हवारा का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील महमूद प्राचा कि उनके पास हवारा के खिलाफ लंबित मामलों की सूचना नहीं है क्योंकि ज्यादातर मामले पंजाब में लंबित है।
हवारा इस समय तिहाड़ जेल में बंद है।
वर्ष 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के षडयंत्रकर्ता बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के आतंकवादी जगतार सिंह हवारा को पंजाब की एक अदालत ने 31 जुलाई, 2007 को मौत की सजा सुनाई थी।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर, 2010 को हवारा की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।
इस घटना में तत्कालीन मुख्यमंत्री समेत 17 लोगों की मौत हुई थी और 15 अन्य घायल हुए थे।
हवारा के साथ पांच अन्य को दिल्ली के लिबर्टी और सत्यम सिनेमा में 22 मई, 2005 को विस्फोट मामले में सात साल जेल की सजा भी सुनाई गई थी।
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