चेन्नई, 15 जून मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से एक सरकारी अस्पताल में उपचाराधीन तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को बृहस्पतिवार को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति प्रदान की।
बालाजी की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति जे. निशा बानू और डी. भरत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश दिया।
इसने बालाजी की कथित अवैध गिरफ्तारी से जुड़ी मुख्य याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 22 जून तय की।
अदालत ने कहा कि बालाजी न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे और ईडी को मंत्री की जांच के लिए चिकित्सकों की अपनी टीम तैनात करने की भी अनुमति दी।
पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया है कि उनका कावेरी अस्पताल, चेन्नई में एक नियमित चिकित्सक है, जब मामला किसी व्यक्ति के जीवन से संबंधित है, तो हमारा विचार है कि न्यायिक हिरासत में लिए गए व्यक्ति की ओर से किए गए अनुरोध के बाद उन्हें अपने खर्चे पर अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाए। हालांकि, वह न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।’’
इस बीच, शहर की एक अदालत ने अंतरिम जमानत के लिए बालाजी की याचिका जबकि ईडी द्वारा मंत्री की हिरासत की मांग करने संबंधी अनुरोध पर सुनवाई की और इस पर आदेश शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
उधर, अन्नाद्रमुक नेताओं के एक समूह ने बृहस्पतिवार को यहां तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात की और ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को मंत्रिपरिषद से हटाने की मांग की।
पार्टी के सांसद और राज्य के पूर्व मंत्री सी.वी. शणमुगन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अन्नाद्रमुक महासचिव ए.के. पलानीस्वामी द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि राज्यपाल बालाजी को मंत्रिपरिषद से हटा दें।
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