देश की खबरें | गंभीर अपराधों के आरोपियों को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई 18 मार्च को
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नयी दिल्ली, 13 मार्च उच्चतम न्यायालय 18 मार्च को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें गंभीर अपराधों के आरोपी उम्मीदवारों पर चुनाव लड़ने से रोक लगाने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ के इस मामले पर सुनवाई करने की उम्मीद है।
सितंबर 2022 में शीर्ष अदालत ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर केंद्र और निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से जवाब मांगा था।
इस याचिका में उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि आपराधिक मामलों में जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाए। याचिका में शीर्ष अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र और निर्वाचन आयोग को ऐसे उम्मीदवारों पर रोक लगाने का निर्देश दे जिन पर गंभीर अपराधों को लेकर मुकदमा चल रहा है।
उपाध्याय ने वकील अश्वनी कुमार दुबे के जरिये यह याचिका दायर की है जिसमें आरोप लगाया गया है कि विधि आयोगों की सिफारिशों एवं अदालत के पिछले निर्देशों के बाद भी केंद्र एवं निर्वाचन आयोग ने कदम नहीं उठाया।
याचिका में कहा गया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के 539 विजयी प्रत्याशियों में से लगभग 233 या 43 प्रतिशत ने आपराधिक मामलों का सामना करने की बात कही है।
गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की एक रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि 2009 से अबतक गंभीर आपराधिक मामले घोषित करने वाले सांसदों की संख्या में 109 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें एक सांसद ने अपने खिलाफ 204 आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इन एक सांसद के विरूद्ध गैर इरादतन हत्या, घर में जबरन प्रवेश, डकैती, आपराधिक धमकी आदि जैसे मामले दर्ज हैं।
याचिका में कहा गया है कि राजनीति के अपराधीकरण के कारण लोगों को बहुत नुकसान हुआ और पार्टियां अब भी गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को खड़ा कर रही हैं
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