देश की खबरें | राजस्व से अधिक महत्त्वपूर्ण है स्वास्थ्य: अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल उच्च न्यायालय ने राज्य में सरकारी पेय पदार्थ निगम द्वारा संचालित शराब की दुकानों के बाहर लोगों की भीड़ और वहां कोविड दिशानिर्देशों के उल्लंघन को रोकने में राज्य सरकार की नाकामी पर बुधवार को नाराजगी व्यक्त करते हुए उससे कहा कि स्वास्थ्य, राजस्व से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

कोच्चि, सात जुलाई केरल उच्च न्यायालय ने राज्य में सरकारी पेय पदार्थ निगम द्वारा संचालित शराब की दुकानों के बाहर लोगों की भीड़ और वहां कोविड दिशानिर्देशों के उल्लंघन को रोकने में राज्य सरकार की नाकामी पर बुधवार को नाराजगी व्यक्त करते हुए उससे कहा कि स्वास्थ्य, राजस्व से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली की पीठ ने कहा कि केरल वर्तमान में सभी राज्यों में कोविड ​​मामलों में नंबर एक पर है और राज्य उचित उपाय करके संक्रमण को कम करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों, विशेष रूप से शराब की दुकानों पर भीड़ एकत्र नहीं होने दी जानी चाहिए।

अदालत ने कहा, "इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि आज की स्थिति में, केरल राज्य कोविड-19 मामलों में नंबर एक पर है। सरकार एक ओर, उचित उपाय करके कोविड मामलों की संख्या को कम करने की कोशिश कर रही है, तो वहीं सरकार को सार्वजनिक स्थानों, विशेष रूप से शराब की दुकानों पर भीड़ जमा नहीं होने देनी चाहिए। स्वास्थ्य, राजस्व से अधिक महत्त्वपूर्ण है।"

पीठ ने आगे कहा कि भले ही केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोविड प्रोटोकॉल दिशानिर्देशों के संबंध में समय-समय पर आदेश जारी किए गए, लेकिन "कुछ स्थानों, विशेष रूप से शराब की दुकानों पर इसका पालन नहीं किया गया।"

पीठ ने कहा, "उपरोक्त आदेशों (केंद्र और राज्यों के) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधों का पालन करने में किसी भी चूक को गंभीरता से लिया जाएगा। लेकिन हम पाते हैं कि अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।"

मामले से जुड़े एक वकील ने कहा कि पीठ ने शराब की दुकानों के बाहर कोविड ​​दिशानिर्देशों के खुले उल्लंघन और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की ‘निष्क्रियता’ पर नाराजगी जाहिर की।

अदालत एक वकील विजयन द्वारा दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में राज्य को बार और होटलों को उसी दर पर शराब बेचने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया गया है, जैसे कि बीईवीसीओ की दुकानों पर दी गई है।

अदालत में विजयन की ओर से अधिवक्ता सी राजेंद्रन ने कहा कि पीठ ने याचिका के साथ संलग्न ‘‘शराब की दुकानों के बाहर लगी भीड़भाड़ और उस समय पुलिस के मूकदर्शक के रूप में खड़े होने’’की तस्वीरों को देखने के बाद नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि स्थिति से निपटने और ऐसी स्थिति फिर से पैदा नहीं होने देने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं?

अधिवक्ता बी के गोपालकृष्णन के माध्यम से दाखिल याचिका के अनुसार, राज्य सरकार ने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान केरल में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी और शराब की दुकानें 17 जून को ही फिर से खोली गईं थी।

याचिका में दावा किया गया है कि हालांकि, सरकार ने राज्य में शराब के एकमात्र वितरक बीईवीसीओ के थोक लाभ को आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का निर्णय लिया और बार तथा होटलों को बीयर को छोड़कर सभी प्रकार की शराब की बिक्री बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

याचिकाकर्ता ने सरकार को बार और होटलों में शराब की बिक्री सुनिश्चित करने और कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है।

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