देश की खबरें | उच्च न्यायालय अल्पसंख्यकों के लिए सीयूईटी स्कोर को लेकर जेएमसी की याचिका पर सुनवाई करेगा
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नयी दिल्ली, 16 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह जीसस एंड मेरी कॉलेज (जेएमसी) की उस याचिका पर 24 मई को सुनवाई करेगा, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की एक अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
अधिसूचना में बिना किसी साक्षात्कार के अल्पसंख्यक कोटे के तहत केवल विश्वविद्यालयीन सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) स्कोर के आधार पर दाखिले पर जोर दिया गया है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। पीठ को सूचित किया गया कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज द्वारा इसी तरह की एक लंबित याचिका पर 24 मई को सुनवाई होने वाली है।
याचिका में जीसस एंड मेरी कॉलेज की तरफ से पेश वकील रोमी चाको ने कहा कि यह एक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान है और संविधान के तहत दाखिले के लिए छात्रों का चयन करने और शैक्षणिक संस्थान का संचालन करने के इसके अधिकार में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है या इसे छीना नहीं जा सकता है। जीसस एंड मेरी कॉलेज महिलाओं का कॉलेज है।
याचिकाकर्ता कॉलेज ने दलील दी है कि अल्पसंख्यक कोटे के तहत दाखिले में सीयूईटी स्कोर के लिए 100 प्रतिशत वेटेज पर जोर देने वाला दिल्ली विश्वविद्यालय का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन करता है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘दिल्ली विश्वविद्यालय ने अब संकल्प लिया है कि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष (2023) के दौरान 50 प्रतिशत ईसाई कोटे के संबंध में भी प्रवेश केवल सीयूईटी स्कोर के आधार पर होगा और कोई साक्षात्कार नहीं होगा तथा साक्षात्कार के लिए 15 प्रतिशत अंकों को जोड़ने की अनुमति नहीं होगी।’’
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता कॉलेज को अल्पसंख्यक वर्ग में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए साक्षात्कार आयोजित करने के अधिकार से वंचित करने का विश्वविद्यालय का यह निर्णय सेंट स्टीफेंस कॉलेज के मामले में उच्च न्यायालय के सितंबर 2022 के फैसले के विपरीत है, जिसमें उसने साक्षात्कार आयोजित कर अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों का चयन करने के कॉलेज के अधिकार को मान्यता दी है।
याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के आदेश में बिल्कुल भी समझदारी नहीं दिखाई गई है।
पिछले साल, सेंट स्टीफेंस कॉलेज ने डीयू के उस पत्र को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी, जिसमें उसे अपने विवरणिका को वापस लेने के लिए कहा था। विवरणिका में सीयूईटी को 85 प्रतिशत वेटेज दिया गया था और स्नातक पाठ्यक्रमों में अनारक्षित सीटों पर प्रवेश के लिए कॉलेज साक्षात्कार को 15 प्रतिशत दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने सितंबर 2022 में सेंट स्टीफंस कॉलेज को अपने स्नातक पाठ्यक्रमों में गैर-अल्पसंख्यक छात्रों को दाखिला देते समय सीयूईटी 2022 स्कोर को 100 प्रतिशत वेटेज देने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के तहत अल्पसंख्यक संस्थान को दिए गए अधिकारों को गैर-अल्पसंख्यकों तक नहीं बढ़ाया जा सकता है।
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