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देश की खबरें | घृणा भाषण : पुलिस ने न्यायालय से कहा, दिल्ली के कार्यक्रम में किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बोला गया

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देश की खबरें | घृणा भाषण : पुलिस ने न्यायालय से कहा, दिल्ली के कार्यक्रम में किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बोला गया

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल दिल्ली पुलिस ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कार्यक्रम में किसी समुदाय के खिलाफ कोई विशेष शब्द नहीं बोले गए थे।

उच्चतम न्यायालय हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों में कथित तौर पर घृणा भाषण देने वालों के खिलाफ जांच व कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

पुलिस ने शीर्ष अदालत में दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कथित घटना के सिलसिले में कार्रवाई के लिए उससे संपर्क नहीं किया और सीधे उच्चतम न्यायालय का रुख किया, जिसे अनुचित ठहराया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत पत्रकार कुर्बान अली और पटना उच्च न्यायालय की अवकाश प्राप्त न्यायाधीश व वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित घृणा भाषण से जुड़ी घटनाओं की विशेष जांच दल (एसआईटी) से ‘‘स्वतंत्र, विश्वसनीय एवं निष्पक्ष जांच’’ कराने का निर्देश देने की अपील की गई है।

दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में कहा है 19 दिसंबर 2021 को ‘‘हिंदू युवा वाहिनी’’ द्वरा आयोजित कार्यक्रम में घृणा भाषण दिए जाने का आरोप लगाते हुए कुछ शिकायतें दर्ज कराई गई थीं और सभी शिकायतों को संकलित कर मामले की जांच शुरू की गई थी।

पुलिस के मुताबिक, मामले की ‘‘गहन जांच’’ और वीडियो में मौजूद सामग्री के आकलन के बाद पुलिस को शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुरूप कोई भी सामग्री नहीं मिली।

हलफनामे में कहा गया है, ‘‘दिल्ली के कार्यक्रम से जुड़े वीडियो में किसी खास वर्ग या समुदाय के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला गया था। इसलिए जांच और कथित वीडियो के आकलन के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि कथित घृणा भाषण में किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत भड़कने वाले शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया है।’’

पुलिस ने बताया कि इसके बाद मामले को बंद कर दिया गया।

उसने कहा, ‘‘भाषण में ऐसे किसी भी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया था, जिसका अर्थ या व्याख्या ‘‘नस्ली सफाए के लिए मुस्लिमों के नरसंहार या पूरे समुदाय की हत्या के आह्वान के तौर पर मानी जा सकती है।’’

हलफानामा में कहा गया है कि दिल्ली के कार्यक्रम में किसी समूह, समुदाय, नस्ल, धर्म या पंथ के खिलाफ कोई घृणा प्रकट नहीं की गई, बल्कि भाषण एक धर्म को सशक्त करने के लिए था, ताकि उसके अस्तित्व पर मंडराने वाले खतरे से निपटा जा सके।

इसमें कहा गया है कि भाषण का किसी धर्म विशेष के लोगों के नरसंहार के आह्वान से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था।

पुलिस ने कहा, ‘‘हमें दूसरों की राय के प्रति सहिष्णुता रखनी चाहिए। असहिष्णुता लोकतंत्र के लिए उतनी ही खतरनाक है, जितनी कि संबंधित व्यक्ति के लिए। याचिकाकर्ता मूल भावना और उसके संदेश को खारिज करते हुए चुनिंदा अंश के आधार पर गलत और बेतुका संदर्भ पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

हलफनामे में कहा गया है कि दिल्ली की कथित घटना से संबंधित याचिका में आरोपों को साबित करने के लिए कोई तथ्य नहीं हैं, लिहाजा इसे खारिज किया जाना चाहिए।

पुलिस ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने आपराधिक मामला दर्ज करवाने के लिए विधि द्वारा स्थापित किसी भी प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया और सीधे शीर्ष अदालत का रुख किया।

हलफनामे में कहा गया है, ‘‘अदालत को ऐसी प्रवृत्ति को अनुचित ठहराना चाहिए, हतोत्साहित करना चाहिए। वरना पहले से ही मुकदमों के बोझ का सामना कर रही इस अदालत में मामलों की बाढ़ आ जाएगी।’’

इस मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक अली ने कहा कि उनकी चिंता ‘‘आधारहीन नहीं’’ है।

उन्होंने ‘‘पीटीआई-’’ से कहा, ‘‘हमने जो याचिका में कहा है, उस पर कायम हैं। यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। हम अदालत में उचित जवाब अदालत दाखिल करेंगे।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 14, 2022 02:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).