देश की खबरें | हरियाणा हिंसा: न्यायालय ने सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने के आदेश दिए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की सीमा से लगे हरियाणा में सांप्रदायिक हिंसा में छह लोगों की मौत हो जाने के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने तथा नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए।

नयी दिल्ली, दो अगस्त दिल्ली की सीमा से लगे हरियाणा में सांप्रदायिक हिंसा में छह लोगों की मौत हो जाने के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने तथा नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए।

शीर्ष अदालत ने हालांकि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

नफरती भाषण से माहौल खराब होने का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस.वी. भट्टी की पीठ ने संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी अदेश दिया।

पीठ ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को संभालकर रखा जाए।

इसने कहा, ‘‘सुनवाई के दौरान, यह स्वीकार किया गया कि 21 अक्टूबर, 2022 के आदेश में दिए गए निर्देशों का पालन किया जाना है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद और विश्वास है कि पुलिस अधिकारियों सहित राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करेंगी कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण न दिए जाएं और किसी तरह की हिंसा न हो, या संपत्ति को नुकसान न पहुंचाया जाए। और जहां भी आवश्यकता होगी, पर्याप्त संख्या में पुलिस बल या अर्धसैनिक बल तैनात किये जाएंगे।’’

न्यायालय ने निर्देश दिया कि रजिस्ट्री इस आदेश के बारे में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली की राज्य सरकारों के सरकारी वकीलों को सूचित करे।

शीर्ष अदालत ने केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू को निर्देश दिया कि वे तुरंत अधिकारियों से संपर्क करें और सुनिश्चित करें कि अब कोई अप्रिय घटना न हो।

राजू ने निर्देश लेने के लिए अदालत से समय मांगा। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार के लिए निर्धारित कर दी।

पत्रकार शाहीन अब्दुल्ला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू. सिंह ने अदालत से कहा कि दक्षिणपंथी संगठनों विहिप और बजरंग दल द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विभिन्न हिस्सों में 23 प्रदर्शनों की घोषणा की गई है, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता के वकील ने प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई की मांग की, जिसके बाद इसे न्यायमूर्ति खन्ना और न्यायमूर्ति भट्टी की पीठ को सौंपा गया।

इस बात पर जोर देते हुए कि भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की परिकल्पना करता है, शीर्ष अदालत ने पिछले साल 21 अक्टूबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने कहा था कि ऐसे मामलों में शिकायत मिलने की प्रतीक्षा किए बिना मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि 31 जुलाई को भीड़ द्वारा विहिप के जुलूस को रोकने की कोशिश के बाद नूंह में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में दो होम गार्ड सहित छह लोगों की मौत हो गई। राज्य सरकार के अनुसार, हिंसा के सिलसिले में अब तक 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

हरियाणा के कुछ जिलों में हिंसा की घटनाओं को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है।

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हरियाणा के नूंह तथा गुरुग्राम में साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में कई स्थानों पर प्रदर्शन किए, जिससे शहर के कई हिस्सों में यातायात अवरूद्ध हो गया।

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में बजरंग दल के समर्थक निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन के समीप हनुमान चालीसा पढ़ते देखे जा सकते हैं। बाद में, उन्होंने विकास मार्ग को अवरुद्ध करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया।

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