देश की खबरें | एचएएल, एमआरएफए परियोजना में किसी भी विदेशी एयरोस्पेस दिग्गज से हाथ मिलाने की स्थिति में: माधवन

नयी दिल्ली, तीन जुलाई हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) महत्वाकांक्षी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) कार्यक्रम के तहत भारत में लड़ाकू जेट बनाने के लिए किसी भी विदेशी सैन्य विमान विनिर्माता के साथ साझेदारी करने के लिए बेहतर स्थिति में है। सरकारी वैमानिकी कंपनी के प्रमुख आर माधवन ने रविवार को यह बात कही।

सरकार, भारतीय वायुसेना के लिए 20 अरब डॉलर की लागत से 114 जेट खरीदने के लिए आगे बढ़ रही है, जिसे हाल के वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े सैन्य खरीद कार्यक्रमों में से एक के रूप में माना जा रहा है।

शुरू में यह संकेत दिया गया था कि विमान को रणनीतिक साझेदारी (एसपी) मॉडल के तहत खरीदा जाएगा, जो किसी विदेशी विनिर्माता को प्रमुख सैन्य आयुध निर्माण के लिए किसी भारतीय कंपनी के साथ हाथ मिलाने की बात कहता है।

एचएएल के शीर्ष अधिकारी ने यह भी कहा कि सरकार को एमआरएफए परियोजना के तहत भारतीय वायुसेना के लिए विमान पर फैसला करना चाहिए और भारतीय भागीदार चुनने का काम विमान विनिर्माता पर छोड़ देना चाहिए।

माधवन ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘हमारे बुनियादी ढांचे और अनुभव के साथ, एचएएल विमान उत्पादन के लिए किसी विदेशी इकाई के साथ हाथ मिलाने के लिए बेहतर स्थिति में है। निश्चित रूप से, हम इस परियोजना के लिए भारतीय इकाई बनने पर विचार कर रहे हैं।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या विशाल परियोजना को रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत क्रियान्वित किया जाना चाहिए, एचएएल प्रमुख ने केवल इतना कहा कि इसे व्यवसाय प्रतिष्ठानों पर छोड़ दिया जाना चाहिए कि वे अपना समाधान खोजें।

माधवन ने कहा, ‘‘विमान पर एक बार निर्णय हो जाने के बाद, विनिर्माता को अपने भारतीय साझेदार के बारे में फैसला करने दें और उन्हें (कीमत) उद्धृत करने दें। यह एक संभावना है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मूल उपकरण विनिर्माता एचएएल के हाथ मिलाने में सहज महसूस करता है, तो उसे आने दें। अगर उसे कोई और मिल जाए, तो उन्हें वहां जाने दें।’’

अप्रैल 2019 में, वायुसेना ने 114 जेट हासिल करने के लिए आरएफआई (सूचना के लिए अनुरोध), या एक प्रारंभिक निविदा जारी की थी।

सौदे के शीर्ष दावेदारों में लॉकहीड मार्टिन का एफ-21, बोइंग का एफ/ए-18, डसॉल्ट एविएशन का राफेल, यूरोफाइटर टाइफून, रूसी विमान मिग-35 और साब का ग्रिपेन शामिल है।

पिछले हफ्ते, वायुसेना प्रमुख एअर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने ‘पीटीआई-’ से कहा था कि विशाल परियोजना के विजेता को प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण सुनिश्चित करना होगा क्योंकि इसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल के ढांचे के तहत क्रियान्वित किया जाएगा।

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