देश की खबरें | गुजरात उच्च न्यायालय ने कारण बताओ नोटिस संबंधी पूर्व आईपीएस अधिकारी की याचिका खारिज की

अहमदाबाद, एक मई गुजरात उच्च न्यायालय ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी रजनीश राय की उस याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया, जो असम में 2017 के एक कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने को चुनौती देने वाली उनकी अर्जियों को अस्वीकार करने के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की अहमदाबाद पीठ के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।

न्यायमूर्ति विपुल पंचोली और न्यायमूर्ति हसमुख सुथार की खंडपीठ ने अहमदाबाद कैट के 16 फरवरी, 2023 और 22 मार्च, 2023 के आदेशों को चुनौती देने वाली राय की याचिका अधिकार क्षेत्र के आधार पर खारिज कर दी।

अदालत ने यह घोषित किए जाने के अनुरोध को भी खारिज कर दिया कि अहमदाबाद पीठ को राय की अर्जियों की सुनवाई करने और उन पर फैसला करने का अधिकार है। उसने कहा कि न्यायाधिकरण ने उनकी याचिकाएं खारिज करने में कोई त्रुटि नहीं की।

गुजरात में सेवाएं देते समय राय ने 2007 में सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डी जी वंजारा, (राजस्थान काडर से) दिनेश एम एन और राजकुमार पांडियन को गिरफ्तार किया था।

राय 1992 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी थे। उन्होंने 2017 के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में दिसंबर 2021 में उन्हें जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ कैट की अहमदाबाद पीठ का रुख किया था।

यह मुठभेड़ उस समय हुई थी जब वह मेघालय के शिलांग में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में कार्यरत थे।

पूर्वोत्तर क्षेत्र में सीआरपीएफ के तत्कालीन आईजी के रूप में राय ने 17 अप्रैल, 2017 को सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) को एक रिपोर्ट भेजी थी जिसमें असम के चिरांग में सेना, असम पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और सीआरपीएफ द्वारा चलाए संयुक्त अभियान के दौरान उस वर्ष 29-30 मार्च को हुई मुठभेड़ की सच्चाई की जांच किए जाने की सिफारिश की गई थी। इस मुठभेड़ में दो व्यक्ति मारे गए थे।

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