देश की खबरें | गुजरात: अदालत ने वड़ोदरा पैलेस के पास रेलवे के निर्माण कार्य पर रोक लगाने की पीआईएल खारिज की

अहमदाबाद, 15 जून गुजरात उच्च न्यायालय ने वड़ोदरा में 106 साल पुराने प्रताप विलास पैलेस के परिसर के अंदर चार मंजिला इमारत पर निर्माण कार्य करने से रेलवे को रोकने के लिए निर्देश जारी करने को लेकर दायर जनहित याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।

यह पैलेस वड़ोदरा में एक धरोहर इमारत है। बड़ौदा के महाराजा यहीं रहते थे और नया निर्माण रेलवे के वहां स्थित दो शीर्ष संस्थानों के लिए अकादमिक खंड के रूप में सेवा देगा।

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति आशुतोष जे शास्त्री की खंडपीठ ने वड़ोदरा के हैरिटेज ट्रस्ट द्वारा दायर पीआईएल खारिज कर दी।

अदालत ने कहा कि भारतीय रेल, जिसकी यह संपत्ति है, ने भारतीय रेल राष्ट्रीय अकादमी (एनएआईआर) और नेशनल रेलवे ऐंड ट्रांस्टपोर्टेशन इंस्टीट्यूट (एनटीआरआई) के लिए चार मंजिला अकादमिक खंड के निर्माण के दौरान धरोहर को नुकसान पहुंचाए बगैर इसका संरक्षण करने का आश्वासन दिया है।

अदालत ने 16 दिसंबर 2020 के अपने उस अंतरिम आदेश को भी वापस ले लिया, जिसके तहत रेलवे को उक्त स्थान पर प्रस्तावित भवन के निर्माण के लिए आगे कोई कदम उठाने से रोक दिया गया था।

अदालत ने कहा कि रेलवे को इमारत का निर्माण करने से रोकने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावित इमारत एक अकादमिक खंड है और कोई पर्यटन या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान नहीं है तथा जगह की कमी के चलते इसकी योजना बनाई गई।

अदालत ने कहा कि प्रताप विलास पैलेस में किसी तरह का बदलाव करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। परियोजना वाणिज्यिक फायदे के लिए किसी निजी पक्ष को लाभ नहीं पहुंचाएगी।

पीठ ने कहा कि रेलवे अपनी ही जमीन पर एक नया अकादमिक खंड बना रहा है। अदालत ने कहा, ‘‘मौजूदा मामले में प्रताप विलास पैलेस लोगों की पहुंच वाला कोई सार्वजनिक संपत्ति नहीं है...। ’’

गौरतलब है कि इस पैलेस का निर्माण महाराजा सयाजीराव तृतीय गायकवाड़ ने कराया था, जिन्होंने बड़ौदा राज्य में 1875 से 1939 तक शासन किया था।

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