देश की खबरें | आजादी में योगदान देने वाले महापुरुष अतीत में खो नहीं जाते, भविष्य का रास्ता दिखाते हैं: मोदी
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नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा और सरदार पटेल की 150वीं जयंती के वर्ष को जीवंत बनाने के लिए देशवासियों से सहभागिता का आह्वान करते हुए रविवार को कहा कि आजादी के आंदोलन में योगदान देने वाले महापुरुष अतीत में खो नहीं जाते हैं, बल्कि उनका जीवन वर्तमान को भविष्य का रास्ता दिखाता है।
आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 150वीं कड़ी में अपने विचार साझा करते हुए झारखंड विधानसभा चुनाव से पूर्व उन्होंने यह भी कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उनकी जन्मस्थली उलिहातू की यात्रा उनके जीवन के खास पलों में एक थी, जिसका उनपर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप मुझसे पूछें कि मेरे जीवन के सबसे यादगार पल क्या रहे तो कितने ही वाकये याद आते हैं। लेकिन, इनमें भी एक पल ऐसा है जो बहुत खास है। वो पल था जब पिछले साल 15 नवंबर को मैं भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उनकी जन्मस्थली झारखंड के उलिहातू गांव गया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस यात्रा का मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा।’’
उन्होंने याद दिलाया कि वह देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें इस पवित्र भूमि की मिट्टी को अपने मस्तक से लगाने का सौभाग्य मिला।
उन्होंने कहा, ‘‘उस क्षण, मुझे न सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम की शक्ति महसूस हुई, बल्कि इस धरती की शक्ति से जुड़ने का भी अवसर मिला। मुझे यह एहसास हुआ कि कैसे एक संकल्प को पूरा करने का साहस देश के करोड़ों लोगों का भाग्य बदल सकता है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में हर युग में कुछ चुनौतियां आईं और हर युग में ऐसे असाधारण भारतवासी जन्मे, जिन्होंने इन चुनौतियों का सामना किया।
इस क्रम में बिरसा मुंडा और सरदार पटेल का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दोनों स्वतंत्रता सेनानियों की 150वीं जयंती को मनाने का निश्चय किया है। सरदार पटेल की जयंती का वर्ष 31 अक्टूबर से और इसके बाद भगवान बिरसा मुंडा का जयंती वर्ष 15 नवम्बर से शुरू होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इन दोनों महापुरुषों ने अलग-अलग चुनौतियां देखीं, लेकिन दोनों की दृष्टि एक थी- ‘देश की एकता’।’’
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने बीते वर्षों में ऐसे महान नायक-नायिकाओं की जयंतियों को नयी ऊर्जा से मनाकर, नई पीढ़ी को नई प्रेरणा दी है।
झारखंड में दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को मतदान होना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 31 अक्तूबर को दिवाली के कारण इस वर्ष सरदार पटेल की जयंती पर ‘रन फॉर यूनिटी’ यानी ‘एकता के लिए दौड़’ कार्यक्रम का आयोजन 29 अक्तूबर को आयोजित किया जाएगा। उन्होंने इस कार्यक्रम में लोगों से अधिक संख्या में भाग लेने का आग्रह किया।
उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान न्यूयॉर्क के ‘टाइम्स स्कवेयर’ से अफ्रीका के छोटे से गांव तक, विश्व के लोगों ने भारत के सत्य और अहिंसा के संदेश को समझा, उसे फिर से जाना और उसे जिया।
उन्होंने कहा कि जब देश ने स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती मनाई तो देश के नौजवानों ने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति को समझा।
उन्होंने कहा, ‘‘इन योजनाओं ने हमें ये एहसास दिलाया कि हमारे महापुरुष अतीत में खो नहीं जाते, बल्कि उनका जीवन हमारे वर्तमान को भविष्य का रास्ता दिखाता है।’’
बिरसा मुंडा और सरदार पटेल के जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘सरकार ने भले ही इन महान विभूतियों की 150वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया है लेकिन आपकी सहभागिता ही इस अभियान में प्राण भरेगी, इसे जीवंत बनाएगी।’’
उन्होंने देशवासियों से इस अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान करते हुए लौह पुरुष सरदार पटेल से जुड़े अपने विचार और कार्य तथा धरती-आबा बिरसा मुंडा की प्रेरणाओं को दुनिया के सामने लाने के लिए कहा।
उन्होंने कहा, ‘‘आईये, एक साथ मिलकर इस उत्सव को भारत की अनेकता में एकता का उत्सव बनाएं, इसे विरासत से विकास का उत्सव बनाएं।’’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘कैलीग्राफी’ का भी उल्लेख किया और कहा कि आजकल जम्मू-कश्मीर में स्थानीय संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के लिए कैलीग्राफी का उपयोग हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने अनंतनाग के फिरदौसा बशीर का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने इसके माध्यम से स्थानीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह का प्रयास उधमपुर के गौरीनाथ भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वह एक सदी से अधिक पुरानी सारंगी के माध्यम से डोगरा संस्कृति और धरोहर को सहेजने में जुटे हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ऐसी असाधारण प्रतिभा के बहुत लोग हैं जो अपनी प्रतिभा से स्थानीय धरोहर का संरक्षण कर रहे हैं।
इस कड़ी में उन्होंने डी वैकुंठम और छत्तीसगढ़ में नारायणपुर के बुटलूराम माथरा का उल्लेख किया जो क्रमश: तेलंगाना में पचास वर्षों से चेरियाल लोक कला को लोकप्रिय बना रहे हैं और अबूझमाडि़या जनजाति की लोककला का संरक्षण कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने रूस के याकुत्स्क में कालिदास के अभिज्ञान शाकुंतलम के मंचन पर प्रसन्नता जताई और कहा कि हाल ही की लाओस यात्रा के दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा लाओस की रामायण का मंचन देखना उनके लिए बेहद रोमांचकारी रहा।
उन्होंने कहा कि कुवैत में अब्दुल्ला अल बारून ने महाभारत और रामायण का अरबी में अनुवाद किया है जबकि पेरू की एरलिंदा गार्सिआ युवाओं को भरतनाट्यम सिखा रही हैं तथा इसी तरह मारिया वालदेस ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण दे रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य दक्षिण अमेरिका के कई देशों में लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने लोगों से हैशटेग ‘कल्चरल ब्रिज’ के माध्यम से ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
मोदी ने ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम में ‘फिट इंडिया’ के बारे में भी बात की और धनतेरस, दीवाली, छठ पूजा और गुरुनानक जयंती की शुभकामनाएं दीं।
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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 27, 2024 04:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

