विदेश की खबरें | युद्ध के बीच यूक्रेन से अनाज निर्यात दुनिया के लिए अहम
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. मॉस्को ने इस मुद्दे पर चिंता पैदा करने वाली बयानबाजी तेज कर दी है। उसने कहा है कि उसके कृषि उत्पाद की बिना किसी बाधा आवाजाही सुनिश्चित करने सहित अन्य मांगे अगर पूरी नहीं होती तो वह सोमवार को समाप्त हो रहे समझौते की मियाद को बढ़ाने से इनकार कर सकता है।
मॉस्को ने इस मुद्दे पर चिंता पैदा करने वाली बयानबाजी तेज कर दी है। उसने कहा है कि उसके कृषि उत्पाद की बिना किसी बाधा आवाजाही सुनिश्चित करने सहित अन्य मांगे अगर पूरी नहीं होती तो वह सोमवार को समाप्त हो रहे समझौते की मियाद को बढ़ाने से इनकार कर सकता है।
काला सागर के रास्ते अनाज निर्यात समझौते के तहत पिछले साल अगस्त में यूक्रेन को 3.28 करोड़ मीट्रिक टन अनाज करने की अनुमति दी गई जिसमें से आधा अनाज विकासशील देशों को भेजा जाना है। इसमें वे देश भी शामिल हैं जिन्हें विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत खाद्य आपूर्ति की जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने कहा कि अगर समझौते की मियाद नहीं बढ़ाई गई तो आपको एक बार खाद्यान्न की कीमतों में ‘वृद्धि’देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘‘मूल्य वृद्धि का यह दौर कब तक रहेगा यह बाजार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।’’
उन्होंने कहा कि अच्छी खबर यह है कि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि विश्व बाजार में गेंहू जैसे उत्पाद पर्याप्त मात्रा में है जिनकी आपूर्ति की जा सकती है और इसकी वजह से कीमतों में तत्काल उछाल नहीं आएगी। लेकिन कुछ देशों में पहले ही खाद्यान्नों की कीमतों में वृद्धि देखी गई है।
अनाज समझौता क्या है ?
यूक्रेन और रूस ने अगस्त 2022 में अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिससे यूक्रेन के तीन काला सागर बंदरगाह फिर से खुल गए, जो मॉस्को के आक्रमण के बाद महीनों से बंद थे।
उन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूसी उपज की आवाजाही की भी सुविधा प्रदान की।
दोनों देश गेहूं, जौ, सूरजमुखी तेल और अन्य किफायती खाद्य उत्पादों के प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं जिन पर अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्से निर्भर हैं। यूक्रेन मक्का का एक बड़ा निर्यातक है, और रूस उर्वरक का जो खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के अन्य महत्वपूर्ण उत्पाद है।
यूक्रेन से निर्यात बाधित होने से जिसे ‘दुनिया की गेंहू की टोकरी’ कहा जाता है, ने वैश्विक खाद्य संकट को बढ़ा दिया और दुनिया भर में अनाज की कीमतें बढ़ गईं।
यह समझौता यह सुनिश्चित करता है कि यूक्रेन की बंदरगाहों में प्रवेश करने और वहां से रवाना होने वाले जहाजों पर हमला नहीं किया जाएगा। रूसी, यूक्रेनी, संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये के अधिकारियों द्वारा जहाजों की जांच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे केवल खाद्य सामग्री ले जा रहे हैं, हथियार नहीं।
इसने क्या प्राप्त हुआ?
इस करार से गेहूं जैसी खाद्य वस्तुओं की वैश्विक कीमतों को कम करने में मदद मिली जो रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी।
समझौत को क्या खतरा है?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि मॉस्को अनाज समझौते की मियाद को तब तक नहीं बढ़ाएगा जबतक पश्चिम ‘हमसे किए गए वादों’ को पूरा नहीं करता। पुतिन ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए बार-बार सद्भावना दिखाई है लेकिन अब बहुत हो गया।’’
उन्होंने कहा कि वह रूसी कृषि बैंक पर प्रतिबंधों और जहाजरानी और बीमा पर प्रतिबंधों को समाप्त करना चाहते हैं। उनका कहना है कि इनपर लगे प्रतिबंधों से कृषि उत्पादों के निर्यात में बाधा उत्पन्न हुई है।
कौन प्रभावित होगा?
अंतराष्ट्रीय बचाव समिति ने अनाज समझौते को ‘‘79 देशों और खाद्य असुरक्षा की अग्रिम पंक्ति के 34.9 करोड़ लोगों के लिए जीवन रेखा’’ करार दिया है। उदाहरण के लिए, पूर्वी अफ्रीका ने गंभीर सूखे और बाढ़ का सामना किया है, जिससे 22 लाख लोगों की फसलें नष्ट हो गई हैं जिसपर वे खाद्य सुरक्षा के लिए निर्भर थे।’’
यूक्रेन को क्या लाभ?
यूक्रेन की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर करती है, और युद्ध से पहले, इसका 75 प्रतिशत अनाज निर्यात काला सागर के माध्यम से होता था।
खाद्य आपूर्ति पर क्या होगा प्रभाव?
महामारी, आर्थिक संकट, सूखा और अन्य जलवायु कारकों के कारण लोगों की पर्याप्त भोजन प्राप्त करने की क्षमता प्रभावित हुई है।
खाद्य और कृषि संगठन ने जुलाई की एक रिपोर्ट में कहा, ऐसे 45 देश हैं जिन्हें खाद्य सहायता की आवश्यकता है। उच्च घरेलू खाद्य कीमतों की वजह से हैती, यूक्रेन, वेनेजुएला और अफ्रीका और एशिया के कई देशों सहित अधिकांश देशों में भूखमरी बढ़ रही है।
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