जरुरी जानकारी | गोयल ने छोटे-मोटे नवाचारों के जरिए फार्मा पेटेंट हासिल करने के प्रयासों की आलोचना की
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नयी दिल्ली, 27 अप्रैल वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कुछ कंपनियों द्वारा छोटे-मोटे नवाचारों के माध्यम से दवा पेटेंट हासिल करने के प्रयासों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के चलन से लाखों लोग सस्ती दवाओं तक पहुंच से वंचित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों और उनके शेयरधारकों के ‘अलौकिक’ मुनाफे के लिए दुनिया को नुकसान उठाना पड़ता है और गुणवत्तापूर्ण व समान स्वास्थ्य सेवा से वंचित होना पड़ता है।
गोयल ने यहां एक कार्यक्रम में कहा, “मुझे अक्सर अनुरोध प्राप्त होते थे कि हमें दवा कंपनियों को भी... उनके पेटेंट में क्रमिक परिवर्तन करने की अनुमति देनी चाहिए तथा उन्हें एक लम्बे समय के लिए नया पेटेंट रखने की अनुमति देनी चाहिए, जिसे हम सामान्यतः पेटेंट की सदाबहारता के रूप में समझते हैं।”
उन्होंने कहा, “यह बहुत दुःख की बात है कि सिर्फ कुछ कंपनियों के लाभ के लिए, सिर्फ कुछ चुनिंदा कंपनियों और संभवतः उनके शेयरधारकों के अलौकिक लाभ के लिए, दुनिया को कष्ट सहना पड़ रहा है।”
भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 3(डी) पहले से ज्ञात औषधियों के लिए पेटेंट को प्रतिबंधित करती है, जब तक कि नए दावे प्रभावकारिता के मामले में बेहतर न हों, जबकि धारा 3(बी) उन उत्पादों के पेटेंट पर रोक लगाती है जो सार्वजनिक हित के विरुद्ध हैं और मौजूदा उत्पादों की तुलना में बढ़ी हुई प्रभावकारिता प्रदर्शित नहीं करते हैं।
कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत से इन कानूनों में संशोधन करने को कहा, जिसका कड़ा विरोध किया गया।
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