जरुरी जानकारी | ‘एंडवांस्ड केमेस्ट्री सेल’ विनिर्माण के लिये फिर से बोलियां आमंत्रित करेगी सरकार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार ने बृहस्पतिवार को ‘एंडवांस्ड केमेस्ट्री सेल’ विनिर्माण को लेकर उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत फिर से बोलियां आमंत्रित करने की घोषणा की।
नयी दिल्ली, 20 जुलाई सरकार ने बृहस्पतिवार को ‘एंडवांस्ड केमेस्ट्री सेल’ विनिर्माण को लेकर उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत फिर से बोलियां आमंत्रित करने की घोषणा की।
कुल 18,100 करोड़ रुपये के इस कार्यक्रम के तहत सरकार का लक्ष्य शेष 20 गीगावॉट घंटा क्षमता (जीडब्ल्यूएच) की अत्याधुनिक रासायनिक बैटरी (एंडवास्ड केमिस्ट्री सेल-एसीएल) विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
भारी उद्योग मंत्रालय शेष 20 गीगावॉट क्षमता के लिये बोली प्रक्रिया फिर से शुरू होने से पहले 24 जुलाई, 2023 को उद्योग प्रतिनिधियों के साथ उनकी राय और सुझाव जानने के लिये संबंधित पक्षों के बीच विचार-विमर्श की सुविधा प्रदान करेगा।
आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘‘मंत्रालय बोली दस्तावेजों को अंतिम रूप देने और जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’
इस नीलामी प्रक्रिया के साथ संभावित आवेदक ‘एंडवास्ड केमिस्ट्री सेल’ के विनिर्माण के लिये संयंत्र लगाने के लिए अपनी बोलियां जमा कर सकते हैं। इससे उन्हें एसीसी पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन के लिये पात्रता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
एसीसी नई पीढ़ी की उन्नत भंडारण प्रौद्योगिकी है। यह विद्युत ऊर्जा को इलेक्ट्रोकेमिकल या रासायनिक ऊर्जा के रूप में संग्रह कर सकती है और जरूरत पड़ने पर इसे वापस विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर सकती है।
इसका प्रमुख रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रिड स्थिरता बनाए रखने, छतों पर लगने वाली सौर परियोजनाओं, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स आदि में उपयोग किया जा सकता है।
भारत ने 2070 तक शुद्ध रूप से शुन्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसके साथ नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ ऊर्जा भंडारण की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
सरकार ने 18,100 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए एसीसी की 50 गीगावॉट घंटे (जीडब्ल्यूएच) की विनिर्माण क्षमता प्राप्त करने के लिये पीएलआई योजना ‘एसीसी बैटरी स्टोरेज पर राष्ट्रीय कार्यक्रम’ को मंजूरी दी थी।
इस पहल के तहत सरकार का जोर घरेलू मूल्यवर्धन हासिल करने के साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि देश में बैटरी विनिर्माण की लागत विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो।
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