देश की खबरें | सरकार के ठोस प्रयासों ने आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर किया है: अनुराग ठाकुर
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नयी दिल्ली, 19 दिसंबर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को कहा कि सरकार के ठोस प्रयासों ने ‘आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र’ को कमजोर कर दिया है, जिसके कारण जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं में भारी कमी दर्ज की गयी।
एक विस्तृत बयान में ठाकुर ने कहा कि सरकार ने जहां गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) को मजबूत करने के लिए कानूनी मोर्चे पर काम किया है, वहीं इसके क्रियान्वयन स्तर पर भी विभिन्न कदम उठाए गए हैं। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (संशोधन) अधिनियम को पेश करके एनआईए को वास्तविक तौर पर एक संघीय संरचना दी गयी है। उन्होंने कहा कि इन उपायों का सामूहिक प्रभाव, आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर कर रहा है।
पाकिस्तान का नाम लिये बगैर सूचना और प्रसारण मंत्री ठाकुर ने कहा कि एक पड़ोसी देश आतंकवादियों को पनाह देता और हिंसा को बढ़ावा देता नजर आता है।
मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में शांति का माहौल बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों की बदौलत 2014 से उग्रवाद प्रभावित हिंसा में 80 प्रतिशत और नागरिकों की मौतों में 89 प्रतिशत की कमी आयी है। इसके अलावा, उन्होंने 2014 के बाद से छह हजार उग्रवादियों द्वारा आत्मसमर्पण की उपलब्धि को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘आतंक के खिलाफ सरकार के संकल्प को सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर बालाकोट स्ट्राइक तक बार-बार प्रदर्शित किया गया है। हमारे सशस्त्र बलों की कार्रवाई से जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं में भारी कमी दर्ज की गयी है। इसी तरह, आतंकवाद को वित्तीय मदद देने के मामलों में सजा की दर 94 प्रतिशत तक हासिल की गयी है।’’
ठाकुर ने कहा कि बोडो समझौता, ब्रू-रियांग समझौता, एनएलएफटी-त्रिपुरा समझौता, कार्बी आंगलोंग समझौता और असम-मेघालय अंतर-राज्यीय सीमा समझौता जैसे शांति समझौतों के जरिये सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थायी शांति का माहौल बनाने के लिए काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे त्रिपुरा और मेघालय सहित पूर्वोत्तर के एक बड़े हिस्से से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफ्स्पा) को हटा लिया गया है।
मंत्री ने कोरोना वायरस प्रकोप के बाद और यूक्रेन तथा अफगानिस्तान में संघर्ष क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों की वतन वापसी के लिए सरकार के कार्यों को रेखांकित किया। ठाकुर ने कहा कि भारत ने दक्षिण सूडान और यमन के संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे विदेशी नागरिकों के लिए भी मदद की पेशकश की।
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