जरुरी जानकारी | सरकार वित्त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में 7.24 लाख करोड़ रुपये कर्ज लेगी

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नयी दिल्ली, 31 मार्च सरकार कोविड संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये संसाधन जुटाने को लेकर वित्त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में 7.24 लाख करोड़ रुपये कर्ज लेगी।

इस वर्ष एक फरवरी को पेश बजट में सरकार ने एक अप्रैल 2021 से शुरू वित्त वर्ष में सकल 12.05 लाख करोड़ रुपये के ऋण की आवश्यकता होने का अनुमान लगाया है।

आर्थिक मामलों के सचिव तरूण बजाज ने कहा, ‘‘बजट में हमने घोषणा की थी कि सकल कर्ज 12.05 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध कर्ज 9.37 लाख करोड़ रुपये रहेगा। वित्त वर्ष 2021-22 की पहली छमाही में हम 7.24 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेंगे जो सकल अनुमानित ऋण का 60.06 प्रतिशत है।’’

अगले वित्त वर्ष में पुराने कर्ज के भुगतान के मद में 2.80 लाख करोड़ रुपये की राशि लौटाने का अनुमान है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण ने 2021-22 का बजट पेश करते हुए कहा था, ‘‘बाजार से लिया जाने वाला सकल कर्ज करीब 12 लाख करोड़ रुपये रहेगा। हमने राजकोषीय मजबूती के रास्ते पर आगे बढ़ने की योजना बनायी है और राजकोषीय घाटा धीरे-धीरे कम करते हुए 2025-26 तक जीडीपी के 4.5 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है।’’

सरकार राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिये ऋण प्रतिभूति और ट्रेजरी बिल जारी कर बाजार से कर्ज लेती है।

बजट में एक अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष के लिये राजकोषीय घाटा 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है जो 2020-21 के 9.5 प्रतिशत से कम है।

बजाज ने कहा कि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष के लिये राजकोषीय घाटा बजट में घोषित संशोधित अनुमान के आसपास रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने आरबीआई को 31 मार्च, 2026 तक खुदरा मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत घट-बढ़ के साथ 4 प्रतिशत पर बनाये रखने का लक्ष्य दिया है।

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