देश की खबरें | देश को बचाने के लिये सरकार को आवश्यक समायोजन करने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए: न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्वोत्तर के कई राज्यों के उग्रवाद और हिंसा प्रभावित होने के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि देश को बचाने के लिए आवश्यक समायोजन करने के लिए सरकार को “कुछ स्वतंत्रता और छूट” दी जानी चाहिए।
नयी दिल्ली, छह दिसंबर पूर्वोत्तर के कई राज्यों के उग्रवाद और हिंसा प्रभावित होने के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि देश को बचाने के लिए आवश्यक समायोजन करने के लिए सरकार को “कुछ स्वतंत्रता और छूट” दी जानी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विशेष रूप से असम पर लागू नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारों को राष्ट्र की समग्र भलाई के लिए समायोजन करना होगा।
चंद्रचूड़ ने कहा, “हमें सरकार को भी स्वतंत्रता देनी होगी। आज भी पूर्वोत्तर के कुछ हिस्से हैं, भले ही हम उनका नाम न लें, लेकिन वे राज्य उग्रवाद और हिंसा से प्रभावित हैं। हमें सरकार को देश को बचाने के लिए आवश्यक समायोजन करने की छूट देनी होगी।”
उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि धारा 6ए “स्पष्ट तरीके” से संचालित होती है और नागरिकता कानून का उल्लंघन करके असम में रहने वाले अवैध प्रवासियों को उपकृत करती है।
दीवान ने कहा, “असम और अन्य निकटवर्ती सीमावर्ती राज्य एक सजातीय एकल वर्ग बनाते हैं। असम को अलग करना अस्वीकार्य है।”
पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ असम में अवैध प्रवासियों से संबंधित नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता की जांच करने से जुड़ी 17 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
नागरिकता कानून की धारा 6ए को असम समझौते के अंतर्गत आने वाले लोगों की नागरिकता से जुड़े मुद्दे से निपटने के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में जोड़ा गया था।
इस प्रावधान में कहा गया है कि 1985 में संशोधित नागरिकता अधिनियम के अनुसार जो लोग एक जनवरी, 1966 को या उसके बाद, लेकिन 25 मार्च, 1971 से पहले बांग्लादेश सहित निर्दिष्ट क्षेत्रों से असम आए हैं और तब से असम के निवासी हैं, उन्हें नागरिकता के लिए धारा 18 के तहत स्वयं का पंजीकरण कराना होगा।
परिणामस्वरूप, प्रावधान में असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को नागरिकता देने के लिए ‘कट-ऑफ’ (अंतिम) तारीख 25 मार्च, 1971 तय की गई।
मामले में सुनवाई बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी।
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