गुजरात सरकार ने कहा, वह प्रवासी मजदूरों से लिया गया किराया खुद नहीं रख रही
यह बात कांग्रेस के इस दावे के मद्देनजर कही गई कि राज्य सरकार गरीब एवं बेरोजगार प्रवासी मजदूरों को मुफ्त यात्रा की सुविधा नहीं मुहैया करा रही है जो कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच अपने गृहस्थानों की ओर जा रहे हैं।
अहमदाबाद, पांच मई गुजरात सरकार गृहनगर जाने वाले प्रवासियों को ट्रेन के टिकटों की बिक्री से एकत्रित हुई राशि में कुछ भी अपने पास नहीं रखती, वह इस प्रक्रिया में केवल सुविधा प्रदान करने वाले की भूमिका निभाती है और किराया रेलवे को सौंप देती है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह बात कही और ऐसे यात्रियों से शुल्क वसूल करने के आरोपों को खारिज किया।
यह बात कांग्रेस के इस दावे के मद्देनजर कही गई कि राज्य सरकार गरीब एवं बेरोजगार प्रवासी मजदूरों को मुफ्त यात्रा की सुविधा नहीं मुहैया करा रही है जो कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच अपने गृहस्थानों की ओर जा रहे हैं।
प्रवासी मजदूरों को लेकर दो दर्जन से अधिक ट्रेनें पिछले कुछ दिनों में गुजरात के विभिन्न रेलवे स्टेशनों से विभिन्न राज्यों के लिए रवाना हुई हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव अश्विनी कुमार के अनुसार, यद्यपि प्रवासी मजदूर टिकट के लिए भुगतान करते हैं लेकिन राज्य सरकार वह राशि अपने पास नहीं रखती।
कुमार ने पीटीआई से कहा, ‘‘गुजरात सरकार ट्रेन के टिकटों की बिक्री से मिलने वाली राशि में कुछ भी अपने पास नहीं रखती। हम यात्रियों को पंजीकरण, ट्रेन स्टेशन तक परिवहन और सुचारू तरीके से ट्रेन में सवार होने में सुविधा प्रदान कर रहे हैं।’’
सोमवार को कुमार ने स्पष्ट किया था कि जो लोग अपने गृह स्थानों को वापस जाना चाहते हैं उन्हें ट्रेन यात्रा के लिए टिकट खरीदने होंगे।
कांग्रेस के विपक्ष के नेता परेश धनानी ने मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को चुनौती दी थी और आरोप लगाया था कि उनकी सरकार सच नहीं बोल रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं मुख्यमंत्री को यह साबित करने की चुनौती देता हूं कि राज्य सरकार ने गरीब और बेरोजगार प्रवासी श्रमिकों को मुफ्त यात्रा प्रदान की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप मुझे गलत साबित करते हैं, तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। अन्यथा, मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।’’
अतिरिक्त मुख्य सचिव (श्रम एवं रोजगार विभाग) विपुल मित्रा ने बताया कि राज्य सरकार सिर्फ सुविधा प्रदान करने की भूमिका निभा रही है और एकत्रित किराया रेलवे अधिकारियों को दे रही है।’’
मित्रा ने कहा, ‘‘गुजरात सरकार कोई पैसा नहीं रखती। हमें प्रति ट्रेन लगभग 1,200 टिकट दिए जाते हैं। हम प्रवासियों से भुगतान लेते हैं और पूरी राशि रेलवे को जमा कर देते हैं।’’
मित्रा ने कहा, ‘‘अगर कोई प्रवासी भुगतान करने में असमर्थ है, तो हम उस प्रवासी के वास्ते भुगतान करने के लिए एनजीओ की मदद लेते हैं। किसी भी व्यक्ति को पैसे की वजह से यात्रा से वंचित नहीं किया जाता है।’’
एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि दो मई से मंगलवार सुबह तक, लगभग 27,000 प्रवासी श्रमिकों को ले जाने वाली 23 ट्रेनें गुजरात के विभिन्न रेलवे स्टेशनों से रवाना हुई हैं।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 05, 2020 09:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

