देश की खबरें | सरकार ने एक साथ चुनाव कराने के लिए समिति गठित की, विपक्ष ने की इस कदम की आलोचना

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. संसद के “विशेष सत्र” की घोषणा के एक दिन बाद, सरकार ने शुक्रवार को “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की संभावना तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। इससे लोकसभा चुनाव समय पूर्व कराने की संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं ताकि इन्हें कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही संपन्न कराया जा सके।

नयी दिल्ली, एक सितंबर संसद के “विशेष सत्र” की घोषणा के एक दिन बाद, सरकार ने शुक्रवार को “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की संभावना तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। इससे लोकसभा चुनाव समय पूर्व कराने की संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं ताकि इन्हें कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ ही संपन्न कराया जा सके।

इस कदम ने विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ को सकते में डाल दिया, जिसकी शुक्रवार को मुंबई में बैठक हुई है। विपक्षी गठबंधन ने इस फैसले की निंदा की और इसे देश के संघीय ढांचे के लिए “खतरा” करार दिया।

इस बीच, 18-22 सितंबर तक आयोजित होने वाले संसद के "विशेष सत्र" के दौरान सांसदों की सामूहिक तस्वीर लेने की भी व्यवस्था की जा रही है, जिससे अटकलों का एक और दौर शुरू हो गया है क्योंकि ऐसी तस्वीर आम तौर पर संसद के कार्यकाल की शुरुआत या अंत में ली जाती है।

सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि कोविंद यह अध्ययन करेंगे कि देश में कैसे एक साथ लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं, जैसा कि 1967 तक होता था।

सूत्रों ने कहा कि उम्मीद है कि वह विशेषज्ञों से बात करेंगे और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से भी सलाह ले सकते हैं।

हालांकि सरकार ने सत्र का एजेंडा जारी नहीं किया है, लेकिन उसने इन संकेतों के बीच यह कदम उठाया है कि "विशेष सत्र" 17वीं लोकसभा की आखिरी बैठक हो सकती है और आम चुनाव पहले कराए जा सकते हैं।

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार-बार चुनाव होने से पड़ने वाले वित्तीय बोझ और चुनाव के दौरान विकास कार्य रुकने का हवाला देते हुए, स्थानीय निकायों समेत देश में सभी चुनाव एक साथ कराने के विचार के प्रबल समर्थक रहे हैं।

कोविंद ने भी मोदी के विचार को दोहराया था और 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद इस विचार के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया था।

उन्होंने 2018 में संसद को संबोधित करते हुए कहा था, "बार-बार चुनाव होने से न केवल मानव संसाधनों पर भारी बोझ पड़ता है बल्कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास प्रक्रिया भी बाधित होती है।"

मोदी की तरह, उन्होंने इस विचार पर निरंतर परिचर्चा का आह्वान किया था और उम्मीद जताई थी कि सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आम सहमति पर पहुंचेंगे।

मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल खत्म होने जा रहा है, ऐसे में सरकार का विचार है कि अब इस मुद्दे को लंबा नहीं खींचा जा सकता।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक ने सत्तारूढ़ भाजपा को परेशान कर दिया है और सरकार को समिति गठित करने का निर्णय लेने के लिए मजबूर किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार के इस कदम को ध्यान भटकाने वाला बताया।

खरगे ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, ‘‘सत्तापक्ष लोगों का ध्यान भटकाने की कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले, भारत के नागरिकों के साथ अब और विश्वासघात नहीं किया जा सकेगा।’’

आम आदमी पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि यह ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत विपक्षी दलों की एकता देखने के बाद सत्तारूढ़ दल में "घबराहट" को दर्शाता है।

उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘पहले उन्होंने एलपीजी की कीमतें 200 रुपये कम कीं और अब घबराहट इतनी है कि वे संविधान में संशोधन करने के बारे में सोच रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि वे आगामी चुनाव नहीं जीत रहे हैं।’’

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