देश की खबरें | सरकार, किसान यूनियनों की वार्ता जारी: तोमर ने किसान समूहों से अपने रूख में लचीलापन लाने को कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और तीन केंद्रीय मंत्रियों ने तीन नये कृषि कानूनों पर एक महीने से अधिक समय से जारी गतिरोध को दूर करने के लिए वार्ता जारी रखने की शुक्रवार को प्रतिबद्धता व्यक्त की। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान नेताओं से अपील की कि वे भी सरकार की तरह इस मामले पर अपने रूख में लचीलापन लायें।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 15 जनवरी प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और तीन केंद्रीय मंत्रियों ने तीन नये कृषि कानूनों पर एक महीने से अधिक समय से जारी गतिरोध को दूर करने के लिए वार्ता जारी रखने की शुक्रवार को प्रतिबद्धता व्यक्त की। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान नेताओं से अपील की कि वे भी सरकार की तरह इस मामले पर अपने रूख में लचीलापन लायें।

केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर, रेलवे, वाणिज्य एवं खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री तथा पंजाब से सांसद सोम प्रकाश ने करीब 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ शुक्रवार को विज्ञान भवन में नौवें दौर की वार्ता शुरू की। भोजनावकाश से पहले तीनों कृषि कानूनों के बारे में चर्चा हुई।

बैठक में हिस्सा लेने वाली अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की सदस्य कविता कुरूंगटी ने कहा, ‘‘ सरकार और किसान संगठनों ने सीधी वार्ता की प्रक्रिया जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। ’’

इससे पहले 11 जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने तीन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में गतिरोध को समाप्त करने के लिये चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। हालांकि, समिति के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान ने समिति से अपने को अलग कर लिया था।

पंजाब किसान मोर्चा के बलजीत सिंह बाली ने कहा, ‘‘अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में तोमर जी ने कहा कि आप लगातार कह रहे हैं कि सरकार अड़ी है और इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाये हुए है जबकि हमने आपकी कई मांगों को मान लिया है। क्या आप नहीं समझते कि आपको भी लचीलापन दिखाना चाहिए और केवल कानून को रद्द करने की मांग पर अड़े नहीं रहना चाहिए। ’’

किसान नेता दर्शन पाल ने कहा, ‘‘ तीनों कानूनों के बारे में अच्छी चर्चा हुई। कुछ समाधान निकलने की संभावना है। हम सकारात्मक हैं।’’

एक अन्य किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, ‘‘ सरकार ने हमसे कहा कि समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए, अदालत में नहीं। सभी का समान मत है। कुछ समाधान की संभावना है। ’’

इससे पहले, आठ जनवरी को हुई वार्ता बेनतीजा रही थी। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हजारों की संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं के पास पिछले एक महीने से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

आठ जनवरी की बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका था क्योंकि केंद्र सरकार ने तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया था और दावा किया था कि इन सुधारों को देशव्यापी समर्थन प्राप्त है। वहीं किसान नेताओं ने कहा कि वह अंत तक लड़ाई के लिये तैयार है और कानूनी वापसी के बिना घर वापसी नहीं होगी।

वहीं, उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति में अन्य तीन सदस्यों में शेतकारी संगठन महाराष्ट्र के अध्यक्ष अनिल घनवट, इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमोद कुमार जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी शामिल हैं।

किसान संगठनों और केंद्र के बीच 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में दो मांगों पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और बिजली पर सब्सिडी जारी रखने को लेकर सहमति बनी थी।

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