जरुरी जानकारी | सरकार ने ऋण शोधन अक्षमता कानून के तहत नये मामलों पर लगी रोक अवधि तीन माह बढ़ाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सरकार ने कोरोना वायरस संकट में वित्तीय दबाव झेल रही कंपनियों को बृहस्पतिवार को कुछ और राहत दी। सरकार ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के अंतर्गत नई ऋण शोधन कार्रवाई पर जारी निलंबन अवधि को तीन महीने बढ़ा दिया है।

नयी दिल्ली, 24 सितंबर सरकार ने कोरोना वायरस संकट में वित्तीय दबाव झेल रही कंपनियों को बृहस्पतिवार को कुछ और राहत दी। सरकार ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के अंतर्गत नई ऋण शोधन कार्रवाई पर जारी निलंबन अवधि को तीन महीने बढ़ा दिया है।

अब कर्ज दबाव झेल रही कंपनियों के खिलाफ 25 दिसंबर तक आईबीसी कानून के तहत मामला शुरू नहीं किया जा सकेगा। इससे पहले, 25 मार्च को छह महीने के लिये ऋण शोधन कार्रवाई की प्रक्रिया को निलंबित किया गया था जिसकी मियाद बृहस्पतिवार को समाप्त हो गयी।

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कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की जारी अधिसूचना के अनुसार आईबीसी के तहत कोरोना काल में कर्ज दबाव झेल रही कंपनी के खिलाफ अब 25 दिसंबर तक दिवाला प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकगी। आईबीसी कानून की संबंधित धाराओं की निलंबन अवधि 25 सितंबर से तीन महीने के लिये बढ़ा दी गयी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय ने ट्विटर पर लिखा है कि इस कदम से कंपनियों को वित्तीय दबाव से बाहर निकलने में जरूरी सहायता मिलेगी।

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ट्वीट में कहा गया है, ‘‘आईबीसी की धारा 7, 9 और 10 को तीन महीने के लिये और निलंबित किया जा रहा है। यह सरकार की कंपनियों के संरक्षण की प्रतिबद्धता को दोहराता है।’’

वित्त मंत्री के पास कॉरपारेट कार्य मंत्रालय की भी जिम्मेदारी है।

ऋण शोधन अक्षमता कार्रवाई पर निलंबन देश में ‘लॉकडाउन’ लगाये जाने वाले दिन 25 मार्च से अमल में आया था और इसके लिये जून में अध्यादेश लाया गया था। इसके बाद 23 सितंबर को समाप्त मानसून सत्र में इस संबंध में अध्यादेश के स्थान पा लाये गये विधेयक को संसद ने मंजूरी दे दी।

आईबीसी की धारा 7, 9 और 10 ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया शुरू करने से जुड़ा है।

विधि कंपनी साइरिल अमरचंद मंगलदास के भागीदार एल विश्वनाथन ने कहा कि समयावधि एक झटके में बढ़ाने के बजाय सोच विचारकर किया गयाय है। यह बताता है कि सरकार देखो और इंतजार करो का रुख अपना रही है। उसे भरोसा है कि आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होगी।’’

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