जरुरी जानकारी | सरकार ने सौर उपकरण विनिर्माताओं के लिये आवेदन शुल्क 80 प्रतिशत घटाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिये उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिये कारोबार सुगमता की स्थिति को बेहतर करने के लिए कदम उठाया है।

नयी दिल्ली, 15 मई नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिये उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिये कारोबार सुगमता की स्थिति को बेहतर करने के लिए कदम उठाया है।

इसके तहत मंजूरी प्राप्त सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल्स के विनिर्माताओं तथा मॉडल में व्यापक तौर पर सुधार किये गये हैं। इसमें ‘एप्लिकेशन’ शुल्क में 80 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी के साथ सूचीबद्धता वैधता अवधि को दोगुना करना शामिल हैं।

मंत्रालय ने बयान में कहा कि सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल्स के लिये मॉडल और विनिर्माताओं की स्वीकृत सूची (एएलएमएम) व्यवस्था में व्यापक स्तर पर सुधारों को आगे बढ़ाया गया है।

सुधारों का मकसद प्राथमिक रूप से सौर उपकरण विनिर्माताओं की लागत, आवेदन तथा सूचीबद्धता में लगने वाले समय के साथ-साथ अनुपालन बोझ में कमी लाना तथा कारोबार की स्थिति को सुगम बनाना है।

सुधारों में विनिर्माताओं को कारखाने के निरीक्षण से पहले आवेदन शुल्क का 90 प्रतिशत वापसी के साथ आवेदन वापस लेने की सुविधा देना तथा एएलएमएम के तहत सूचीबद्ध होने की वैधता दो साल से बढ़ाकर चार साल करना शामिल है।

मंत्रालय ने भारतीय मानक ब्यूरो से पंजीकरण प्राप्त होने के सात दिन के भीतर एएलएमएम में अस्थायी तौर पर सूचीबद्धता प्रदान करने और कारखाने के सूचीबद्ध तथा अंतिम तौर पर सूचीबद्धता को लेकर दो महीने की समयसीमा दी है।

बयान के अनुसार, जो सुधार किये गये हैं, उसके तहत एएलएमएम में सूचीबद्धता के लिये अंतिम-उपयोग को लेकर विभिन्न श्रेणियों में न्यूनतम मॉड्यूल दक्षता सीमा तय की गयी है।

उदाहरण के लिये ग्रिड आधारित बिजलीघरों में मॉड्यूल के मामले में दक्षता कम-से-कम 20 प्रतिशत होगी।

इसी तरह, छतों पर लगने वाली सौर परियोजनाएं और सोलर पंपिंग में कम से कम 19.50 प्रतिशत मॉड्यूल दक्षता होगी और सोलर लाइटिंग के मामले में मानक 19 प्रतिशत होगा।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव बी एस भल्ला ने कहा कि फोटोवोल्टिक मॉड्यूल के लिये एएलएमएम में बदलाव से व्यापार करने में आसानी होगी और वर्तमान तथा भविष्य की मांग को पूरा करने के लिये सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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