विदेश की खबरें | वैश्विक आपूर्ति चेन को मिला ‘क्वांटम बूस्ट’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पेटलिंग जया (मलेशिया), 27 जुलाई (360इंफो) विपुल मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण और गणना करने में सक्षम क्वांटम कंप्यूटर वर्तमान में उद्यमों और व्यवसायों को नयी गति प्रदान कर सकते हैं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पेटलिंग जया (मलेशिया), 27 जुलाई (360इंफो) विपुल मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण और गणना करने में सक्षम क्वांटम कंप्यूटर वर्तमान में उद्यमों और व्यवसायों को नयी गति प्रदान कर सकते हैं।

कोविड-19 के दौरान जब वैश्विक आपूर्ति चेन बाधित हुयी थी, उस वक्त अमेरिका का सबसे व्यस्त बंदरगाह ‘लॉस एंजिलिस’ में दुनिया भर से आने वाले कंटेनरों की भीड़ लग गई थी। उस वक्त बंदरगाह ने इस समस्या से निपटने के लिए ‘क्वांटम गणन’ का उपयोग किया।

इसी संकट के दौरान पता चला कि बंदरगाह परंपरागत गणन के मुकाबले क्वांटम कंप्यूटर की मदद से ज्यादा संख्या में कंटेनरों/माल की आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है।

और अब राट्टेर्डैम में स्थित बंदरगाह भी अपने संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए क्वांटम कंप्यूटर का उपयोग कर रहा है।

बेहद प्रतियोगी वैश्विक बाजार में कोई भी व्यापार सिर्फ अपने ब्रांड के आधार पर नहीं बल्कि उनके आपूर्ति चेन की चुस्ती-फुर्ती और दक्षता के आधार पर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं।

नवविकसित क्वांटम तकनीक संसाधनों का उपयोग और लेखा-जोखा रखते हुए गोदाम आदि की क्षमता का भी प्रबंधन कर सकती है।

क्वांटम कंप्यूटर किसी भी उद्यम/व्यवसाय को आंकड़ों के आधार पर तेजी से फैसला करने में मदद करके जटिल समस्याओं को सुलझाने का अवसर देते हैं।

आपूर्ति चेन के व्यवसाय के सामने तमाम चुनौतियां हैं जैसे कि डेटा फ्रेगमेंटेशन को नियंत्रित करने में दिक्कतें, चेन को बाधित करने वाली घटनाएं और लगातार घटती-बढ़ती ग्राहकों की मांग... और ये आपूर्ति चेन में लगातार बाधा उत्पन्न करती हैं।

इन तमाम जटिलताओं के साथ इतने वृहद आंकड़ों के आधार पर तेजी से और सही फैसला लेने के लिए परंपरागत कंप्यूटर के मुकाबले उच्च गणक क्षमताओं की जरूरत होगी।

क्वांटम गणन के क्षेत्र में अब लगातार काम होगा और धीरे-धीरे वह हमारे रोजमर्रा के जीवन में जगह बना लेगा। ‘मैककिन्से’ की हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2035 तक क्वांटम गणन का बाजार 700 अरब अमेरिकी डॉलर का हो जाएगा।

वहीं, ‘द वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ के अनुसार, क्वांटम गणन उन पांच उभरती तकनीकों में शामिल है, जिन पर इस साल खास ध्यान दिया जाना चाहिए।

इस अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि लगातार विकसित हो रहे बाजार के मद्देनजर ‘स्कमपीटर का सिद्धांत’ उद्यमों को लगातार विकसित हो रही नयी तकनीकों को अपने कारोबार में शामिल करने को प्रेरित करेगा।

वर्तमान में परंपरागत कंप्यूटर 0 या 1 के आधार पर बाइनरी लॉजिक या बाइट में गणना करने के लिए ट्रांजिस्ट्रर का सहारा लेते हैं।

लेकिन, क्वांटम कंप्यूटर किसी लॉजिक के सिद्धांत तक सीमित नहीं हैं बल्कि क्वांटम मकैनिक्स के आधार पर काम करते हैं। क्वांटम मकैनिक्स भौतिकी की शाखा है जिसमें किसी तत्व या प्रकाश की प्रकृति का अध्ययन आण्विक या परमाण्विक स्तर पर किया जाता है।

क्वांटम कंप्यूटर ना सिर्फ ‘बाइट’ में बल्कि ‘क्यूबाइट’ में भी गणना करते हें और इसके लिए वे परमाण्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉन और फोटॉन का उपयोग करते हैं। यही बात क्वांटम कंप्यूटर को परंपरागत कंप्यूटर से अलग और बेहतर बनाती है।

क्वांटम कंप्यूटर एक ही समय में अलग-अलग गणना करने में सक्षम है जबकि परंपरागत कंप्यूटर में गणना एक के बाद एक होती है।

परंपरागत गणन के मुकाबले क्वांटम गणन की मदद से जटिल समस्याओं का समाधान बहुत सरलता से हासिल किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए गूगल के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन प्रकाशित करके यह बताया था कि उनके क्वांटम प्रोसेसर ने जिस काम को करने के लिए महज 200 सेकेंड का समय लिया, उसे पूरा करने में अत्याधुनिक सुपर कंप्यूटर को 10,000 साल लगते।

यह वैश्विक आपूर्ति चेन प्रबंधन में बहुत मददगार साबित हो सकता है क्योंकि क्वांटम गणन ज्यादातर वहीं लागू होता है जहां सिमुलेशन या मॉडलिंग, पूर्वानुमान या मैपिंग आदि के लिए वृहद आंकड़े उपलब्ध हों।

यह आपूर्ति चेन के उत्पादों के विकास, खरीद, उत्पादन की योजना बनाने, माल की उपलब्धता का लेखा-जोखा रखने और लॉजिस्टिक आदि के क्षेत्र में मदद कर सकता है।

क्वांटम गणन किसी उत्पाद को विकसित करने से लेकर उसे बाजार में उतारने के बीच लगने वाले समय को घटाने में कंपनियों की मदद कर सकता है।

एक उदाहरण है... जर्मनी की कार कंपनी बीएमडब्ल्यू ने सिमुलेशन की मदद से कार के कल-पूर्जो को डिजाइन करने और उन्हें विकसित करने के लिए क्वांटम गणन में सक्षम कंपनी के साथ करार किया है।

प्रक्रिया के अनुकूलन के माध्यम से कल-पुर्जों का तेजी से परीक्षण किया जा सकता है और डिजाइनों को मंजूरी दी जा सकती है। बीएमडब्ल्यू ने कल-पूर्जों की खरीद में मदद के लिए भी क्वांटम कंप्यूटर डेवेलपर्स के साथ साझेदारी की है ताकि कंपनी की उत्पादन सारणी से मेल खाने वाली और सबसे कम मूल्य पर सामान उपलब्ध कराने वाली कंपनी का आसानी से पता लगाया जा सके।

आईबीएम के अनुसार, क्वांटम गणन की मदद से सबसे कम खर्च में, सबसे छोटे रास्ते का पता लगाकर सामान को तेजी से और अधिकतम दक्षता के साथ गंतव्य तक पहुंचाया जा सकता है।

इसबीच, वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म ‘अर्न्स्ट एण्ड यंग’ ने लॉजिस्टिक और परिवहन अनुकूलन में क्वांटम गणन के दो उदाहरण उपलब्ध कराए हैं।

पहले मामले में कोका-कोला जापान का लक्ष्य 7,00,000 वेंडिंग मशीनों की सेवाओं में सुधार के लिए उत्पाद आपूर्ति के रास्ते का अनुकूलन करना है।

दूसरे मामले में एक लॉजिस्टिक कंपनी ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी की है ताकि वह यातायात परिस्थितियों और वाहन चालक की पसंद आदि जैसे विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए माल परिवहन का अनुकूलन कर सके।

किसी भी आपूर्ति चेन की सफलता खर्च/लागत के सर्वोत्तम प्रबंधन, मांग और आपूर्ति में उचित संतुलन और सही समय पर उत्पादों की डिलिवरी पर निर्भर करती है।

लेकिन व्यवसायों को कई बार इसमें दिक्कतें आती हैं क्योंकि उनके सामने विभिन्न जगहों से, तमाम अलग-अलग लोगों के पास से सूचनाएं, सामग्री और वित्त प्राप्त हो रहा होता है और उन्हें इन सभी जटिल सूचनाओं का विश्लेषण करके उनके आधार पर सही फैसला लेना होता है।

ऐसे में आपूर्ति चेन की दक्षता और चुस्ती-फुर्ती को बनाए रखने और उसे बेहतर बनाने के लिए नयी तकनीकों का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है।

लेकिन क्वांटम गणन या क्वांटम कंप्यूटर में सबकुछ सिर्फ अच्छा नहीं है...

ऐसी परिस्थिति भी पैदा हो सकती है जहां एंक्रीप्शन (साइबर सुरक्षा) के प्रति खतरा पैदा हो जाए। शोर के एल्गोरिदम का उपयोग करके कौशल और वेलोसिटी का विश्लेषण करने वाली क्वांटम गणन प्रक्रिया परंपरागत साइबर सुरक्षा प्रणाली को डिक्रीप्ट कर सकती है और इससे डेटा चोरी जैसा खतरा पैदा हो सकता है। इससे निपटने के लिए कंपनियों को क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की मदद लेनी होगी।

क्वांटम गणन या क्वांटम कंप्यूटर बड़े कॉरपोरेशन या बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए रणनीतिक महत्व का निवेश होंगे।

लेकिन जिन कंपनियों के पास इस तकनीक को अपनाने के लिए धन नहीं है, या जिनके पास यह उपलब्ध नहीं है, उनके पीछे छूट जाने का भी डर है।

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