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विदेश की खबरें | ‘ग्लोबल साउथ’ अक्सर दोहरे मानदंडों का शिकार हुआ है: मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ अक्सर ‘‘दोहरे मानदंडों’’ का शिकार हुआ है और विश्व अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान देने वाले राष्ट्रों को निर्णय लेने वाले मंच पर जगह नहीं मिल पाती है।

विदेश की खबरें | ‘ग्लोबल साउथ’ अक्सर दोहरे मानदंडों का शिकार हुआ है: मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

रियो डी जेनेरियो, छह जुलाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ अक्सर ‘‘दोहरे मानदंडों’’ का शिकार हुआ है और विश्व अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान देने वाले राष्ट्रों को निर्णय लेने वाले मंच पर जगह नहीं मिल पाती है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद(यूएनएससी) सहित प्रमुख वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार पर भी जोर दिया।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि 20वीं सदी में गठित वैश्विक संस्थाओं में विश्व की आबादी के दो-तिहाई हिस्से को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के बिना ये संस्थाएं ऐसे मोबाइल फोन की तरह लगती हैं, जिनके अंदर ‘सिम कार्ड’ तो लगा हुआ है लेकिन नेटवर्क नहीं है।

वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत समूह के सदस्य देशों के नेताओं द्वारा एक सामूहिक तस्वीर खिंचवाने के साथ हुई, जिसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा ने अपना संबोधन दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ अक्सर दोहरे मानदंडों का शिकार हुआ है। चाहे वह विकास का मुद्दा हो, संसाधनों के वितरण या सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का मामला हो।’’

पहले पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस बात पर अफसोस जताया कि जलवायु वित्त, सतत विकास और प्रौद्योगिकी तक पहुंच जैसे मुद्दों पर ‘ग्लोबल साउथ’ को अक्सर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में जिन देशों का बड़ा योगदान है, उन्हें निर्णय लेने वाले मंच पर जगह नहीं दी गई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं है, बल्कि विश्वसनीयता और प्रभावशीलता का भी सवाल है।’’

मोदी ने कहा कि आज दुनिया को एक नयी बहुध्रुवीय और समावेशी व्यवस्था की जरूरत है और इसकी शुरुआत वैश्विक संस्थाओं में व्यापक सुधारों से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘सुधार केवल प्रतीकात्मक नहीं होने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक प्रभाव भी दिखना चाहिए। शासन व्यवस्था, मताधिकार और नेतृत्व के पदों में बदलाव होना चाहिए।’’

प्रधानमंत्री ने तर्क दिया कि नीति-निर्माण में ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की चुनौतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का विस्तार इस बात का प्रमाण है कि यह एक ऐसा संगठन है जो समय के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता रखता है।

‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है, जो प्रौद्योगिकी और सामाजिक विकास के मामले में कम विकसित माने जाते हैं। ये देश मुख्यतः दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित हैं। इसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देश शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘अब हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और बहुपक्षीय विकास बैंकों जैसी संस्थाओं में सुधार के लिए भी यही इच्छाशक्ति दिखानी होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के युग में, जहां हर सप्ताह तकनीक का उन्नयन होता है, किसी वैश्विक संस्था का 80 वर्षों में एक बार भी अपडेट न होना स्वीकार्य नहीं है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘21वीं सदी के सॉफ्टवेयर को 20वीं सदी के टाइपराइटर से नहीं चलाया जा सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने हमेशा अपने हितों से ऊपर उठकर मानव जाति के हित में काम करना अपना कर्तव्य माना है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘हम ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर सभी विषयों पर रचनात्मक योगदान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 06, 2025 10:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).