विदेश की खबरें | जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, गरीबों की मदद की मांग को लेकर वैश्विक प्रदर्शन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. प्रदर्शनकारी जकार्ता, तोक्यो, रोम और बर्लिन में सड़कों पर उतर आए। उन्होंने हाथों में बैनर और पोस्टर ले रखे थे जिन पर "हम जलवायु संकट से चिंतित हैं" और "अभी बहुत देर नहीं हुई है" जैसे नारे लिखे थे।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

प्रदर्शनकारी जकार्ता, तोक्यो, रोम और बर्लिन में सड़कों पर उतर आए। उन्होंने हाथों में बैनर और पोस्टर ले रखे थे जिन पर "हम जलवायु संकट से चिंतित हैं" और "अभी बहुत देर नहीं हुई है" जैसे नारे लिखे थे।

प्रदर्शनों का आयोजन ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर यूथ मूवमेंट’ द्वारा किया गया जो पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग से प्रेरित है जिन्होंने 2018 में स्वीडन की संसद के बाहर अकेले प्रदर्शन करना शुरू किया था।

समूह के जर्मनी चैप्टर की प्रवक्ता दरिया सोतोदे ने कहा, "हम पूरी दुनिया में आंदोलन कर रहे हैं क्योंकि सरकारें अभी भी जलवायु न्याय के लिए बहुत कम काम कर रही हैं।"

उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया में लोग इस संकट से पीड़ित हैं और अगर हम समय पर कार्रवाई नहीं करते हैं तो यह संकट और भी खराब हो जाएगा।’’

बर्लिन में हजारों लोगों ने रैली में भाग लिया, जिसमें जर्मन सरकार से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 100 बिलियन यूरो का फंड स्थापित करने का आह्वान किया गया था।

रोम में, करीब 5,000 युवाओं ने प्रदर्शन किया जो कालेज़ियम के पास समाप्त हुआ।

विरोध प्रदर्शन वैज्ञानिकों की इन चेतावनियों के बाद हुए जिनमें कहा गया है कि देश 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने (ग्लोबल वार्मिंग को औद्योगिकीकरण से पूर्व के समय की तुलना में1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना) के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now