देश की खबरें | सीबीएसई की 10वीं, 12वीं कक्षा के परिणाम में लड़किया फिर अव्वल

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नयी दिल्ली, 12 मई केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा शुक्रवार को घोषित 10वीं और 12वीं की परीक्षा के नतीजों में एक बार फिर लड़कियों ने बाजी मारी है। हालांकि इस साल उत्तीर्ण प्रतिशत व 90 और 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कम रही।

वहीं, सीबीएसई अधिकारियों ने कहा कि पिछले शैक्षणिक सत्र से तुलना करना उचित नहीं है, क्योंकि महामारी की वजह से पिछले सत्र को दो 'टर्म' में विभाजित किया गया था।

वहीं, स्कूलों के प्रधानाचार्यों का दावा है कि इस कमी की वजह स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) को लागू करना है।

इस साल 10वीं कक्षा में 93.12 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए जो पिछले साल के मुकाबले 1.28 प्रतिशत कम है। वहीं महामारी से पहले वर्ष 2019 में 91.10 प्रतिशत विद्यार्थी 10वीं कक्षा में उत्तीर्ण घोषित किए गए थे।

बोर्ड के मुताबिक इस साल 12वीं कक्षा में 87.33 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं जो पिछले साल के 92.71 उत्तीर्ण प्रतिशत के मुकाबले 5.38 प्रतिशत कम है। हालांकि, वर्ष 2019 (कोविड महामारी के पूर्व के शैक्षणिक सत्र) के उत्तीर्ण प्रतिशत 83.40 के मुकाबले यह अधिक है।

इसी तरह की परिपाटी दोनों कक्षाओं में 90 या 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी देखने को मिली।

सीबीएसई नतीजों के मुताबिक 12वीं कक्षा में 1,12,838 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, जबकि 22,622 विद्यार्थी 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने में सफल रहे हैं। बोर्ड के मुताबिक 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों में 271 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (सीएसडब्ल्यूएन) हैं जबकि इसी श्रेणी के 44 बच्चों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये हैं।

पिछले साल 1,34,797 विद्यार्थियों ने 12वीं कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये थे और 33,432 विद्यार्थियों को 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल हुए थे।

हालांकि, वर्ष 2019 (कोविड महामारी पूर्व के शैक्षणिक सत्र) में क्रमश: 90 और 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 94,299 और 17,693 थी।

बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान दो भागों में परीक्षा ली गई थी और पाठ्यक्रम को महामारी के मद्देनजर एकमुश्त राहत के तहत दो टर्म में विभाजित किया गया था। इस साल, बोर्ड की परीक्षा सालाना एक टर्म के तहत हुई जैसा कि महामारी से पहले कराई जाती थी और विद्यार्थियों ने एक ही बार में पूरे पाठ्यक्रम की परीक्षा दी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, महामारी के पूर्व के वर्षों से ही तुलना उचित होगा और वर्ष 2019 के मुकाबले उत्तीर्ण प्रतिशत में वृद्धि हुई है।’’

बोर्ड के मुताबिक 10वीं कक्षा में 1,95,799 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये हैं जबकि 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 44,297 रही है। बोर्ड ने बताया कि 10वीं कक्षा में विशेष आवश्यकता वाले 278 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये हैं और इस श्रेणी के 58 विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किये।

गौरतलब है कि पिछले साल 10वीं कक्षा में 2,36,993 विद्यार्थी 90 प्रतिशत से अधिक अंक के साथ उत्तीर्ण हुए थे और 64,908 विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये थे। हालांकि, वर्ष 2019 में 10वीं कक्षा के 2,25,143 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक और 57,256 विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किये थे।

बोर्ड ने साथ ही घोषणा की कि ‘‘अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा से बचने’’ के लिए कोई मेधा सूची जारी नहीं की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि बोर्ड ने विद्यार्थियों के अंकों के आधार पर उन्हें प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी देने की प्रक्रिया से दूर रहने का भी फैसला किया है।

बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘सीबीएसई विद्यार्थियों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए कोई मेधा सूची घोषित नहीं करेगा। हालांकि, बोर्ड 0.1 प्रतिशत विद्यार्थियों को मेरिट प्रमाणपत्र जारी करेगा जिन्होंने विभिन्न विषयों में सर्वाधिक अंक हासिल किए हैं।’’

नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस की अध्यक्ष सुधा आचार्य ने कहा ‘‘सीबीएसई बोर्ड परीक्षा केवल अर्हता परीक्षा बन गई है जबकि महाविद्यालयों में प्रवेश सीयूईटी में आने वाले अंकों के आधार पर होगा। विद्यार्थी स्कूल प्रणाली से बाहर जा रहे हैं और सीयूईटी, जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए कोचिंग में प्रवेश ले रहे हैं।’’ नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस के करीब 120 निजी स्कूल सदस्य हैं।

गैर अनुदानित मान्यता प्राप्त निजी स्कूल कार्य समिति के अध्यक्ष भरत अरोड़ा ने भी इसी तरह की राय रखी। उन्होंने कहा, ‘‘ सीयूईटी बड़ा कारण है। उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए सीयूईटी एकमात्र अर्हता होने की वजह से उच्च माध्यमिक स्तर पर स्कूली शिक्षा के उद्देश्यों से समझौता हो रहा है। सीयूईटी के कई लाभ हैं लेकिन स्कूली शिक्षा के साथ भी संतुलन बनाया जाना चाहिए।’’

बोर्डने यह भी घोषणा की कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 में बोर्ड की परीक्षा अगले साल 15 फरवरी से शुरू होंगी।

सीबीएसई ने फैसला किया कि ‘कम्पार्टमेंट’ परीक्षा का नाम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिश के तहत बदलकर ‘सप्लीमेंट्री’(पूरक) परीक्षा कर दी गई है। बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के अंकों में सुधार के लिए और अवसर देने का भी फैसला किया गया है।

बोर्ड के मुताबिक 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को दो विषयों में सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा देकर अंक सुधारने का मौका मिलेगा जबकि 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को यह मौका केवल एक विषय में मिलेगा।

एक अधिकारी ने बताया, ‘‘जिन विद्यार्थियों को पूरक श्रेणी में रखा गया है और जो अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहते हैं, उनके लिए परीक्षा जुलाई में आयोजित की जाएगी और तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी।’’

गौरतलब है कि इस साल 10वीं कक्षा में 1.34 लाख से अधिक विद्यार्थियों को पूरक श्रेणी में रखा गया है, जबकि 12वीं कक्षा में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 1.25 लाख से अधिक है।

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