विदेश की खबरें | जर्मन नौसेना प्रमुख ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का संकल्प लिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. उनका यह बयान अपने सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार चीन के विवादित दावे के परिप्रेक्ष्य में है।

उनका यह बयान अपने सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार चीन के विवादित दावे के परिप्रेक्ष्य में है।

जर्मन पोत फ्रिगेट बेयर्न के तोक्यो पहुंचने के अवसर पर वाइस एडमिरल शॉनबैक ने कहा कि बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय विवाद और क्षेत्र में बदलते सैन्य संतुलन का एशिया से परे व्यापक प्रभाव हो सकता है।

उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नौसेना के पोत का हिंद प्रशांत क्षेत्र में भेजा जाना जापान, अमेरिका और अन्य भागीदारों के प्रति समर्थन दिखाना और शांति, मुक्त नौवहन और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत करने के उन देशों के प्रयासों में शामिल होना है।

बेयर्न दक्षिण चीन सागर से होकर गुजरेगा, जहां चीन अपना दावा पेश करता रहा है।

बेयर्न गत शुक्रवार को तोक्यो पहुंचा। इसके साथ ही वह पिछले 20 वर्षों में जापान का दौरा करने वाला पहला जर्मन युद्धपोत बन गया। जर्मन अधिकारियों ने कहा कि इसने प्रशांत महासागर में एक जापानी विध्वंसक पोत के साथ दो दिनों के अभ्यास सहित समुद्री मार्ग में अन्य नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास किया।

यह पोत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत नवंबर के मध्य से तीन सप्ताह तक उत्तर कोरियाई जहाजों की गतिविधियों की निगरानी करेगा, जिसमें प्रतिबंधित कार्गो का एक जहाज से दूसरे जहाज में स्थानांतरण की निगरानी भी शामिल है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जर्मनी की अपनी पारी संभालने के लिए फ्रिगेट अगस्त में वहां से रवाना हुआ था, जिसने ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड सहित अन्य यूरोपीय देशों का अनुसरण किया। उन देशों के युद्धपोतों ने हाल ही में पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया था।

शॉनबैक ने कहा कि बेयर्न की यात्रा जर्मनी द्वारा इस क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि जर्मनी की अगले साल सैन्य विमान भेजने और दो से तीन साल के भीतर फ्रिगेट और आपूर्ति जहाजों का एक बेड़ा भेजने की योजना है।

एपी

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