देश की खबरें | गिलानी का हुर्रियत से अलग होना उनकी निराशा को दिखाता है : पुलिस महानिदेशक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने मंगलवार को कहा कि सैयद अली शाह गिलानी का अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस से खुद को अलग करना उनकी निराशा और नकारात्मक रुख को दिखाता है।

जम्मू, 30 जून जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने मंगलवार को कहा कि सैयद अली शाह गिलानी का अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस से खुद को अलग करना उनकी निराशा और नकारात्मक रुख को दिखाता है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां लोगों को आतंकवादियों के ‘उत्पीड़न और अत्याचार’ से राहत देने के लिए और अधिक इलाकों को आतंकवाद मुक्त करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है, लेकिन कश्मीर घाटी को आतंकवाद मुक्त करने के लिए कोई समय सीमा नहीं बताई जा सकती क्योंकि पाकिस्तान लगातार आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है।

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राजौरी जिले में महिला पुलिस थाने का उद्घाटन करने के मौके पर पुलिस प्रमुख ने पत्रकारों से कहा, ‘‘गिलानी ने कल खुद को हुर्रियत कांफ्रेंस से अलग कर दिया और उन्होंने अपने पत्र में स्वीकार किया कि गत वर्षों में जानमाल की भारी हानि हुई है एवं जिस उद्देश्य को वह पूरा करना चाहते थे उसमें वह असफल हुए हैं।’’

उन्होंने कहा कि गिलानी द्वारा यह स्वीकार करना कि हुर्रियत के साथ जुड़े लोगों ने इस मंच का इस्तेमाल निजी हित के लिए किया यह उनकी निराशा,अक्षमता, नकारात्मक सोच और नकारात्मक गतिविधि को प्रतिबिंबित करता है।

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उल्लेखनीय है कि 90 वर्षीय गिलानी जो पाकिस्तान समर्थक हुर्रियत कांफ्रेंस के जीवनपर्यंत अध्यक्ष थे, ने सोमवार को आश्चर्यजनक रूप से 16 संगठनों के इस मंच से खुद को अलग करने की घोषणा की थी। उन्होंने संगठन के सदस्यों में जवाबदेही की कमी और आपसी गुटबाजी का आरोप लगाया था।

दिलबाग सिंह ने जोर देकर कहा कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौजूदा समय में घाटी में शांति को मजबूत करने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस साल के शुरुआत से अब तक 128 आतंकवादी मारे गए हैं, लेकिन यहां पर आतंकवादी गतिविधियां जारी रहें, इसके लिए पाकिस्तान आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।

पुलिस महानिदेशक ने कहा, ‘‘ इस महीने विभिन्न अभियानों में 48 आतंकवादी मारे गए हैं जो पिछले साल जून में मारे गए आतंकवादियों की संख्या से अधिक हैं। अनंतनाग जिले में कल मारे गए तीन आतंकवादियों में डोडा का एकमात्र जिंदा आतंकवादी भी शामिल था जबकि दो अन्य आतंकवादी जो हाल में सीआरपीएफ के जवान को शहीद करने और निर्दोष बच्चे की हत्या में शामिल थे उन्हें दक्षिण कश्मीर में आज मार गिराया गया।

उन्होंने कहा कि पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां और इलाकों को आंतकवाद मुक्त करने के लिए कार्य कर रही हैं ताकि लोगों को आतंकवादियों द्वारा किए जाने वाले अत्पीड़न और अत्याचार से मुक्ति मिले।

दिलबाग सिंह ने कहा, ‘‘वे निर्दोष लोगों की हत्या करते हैं, लेकिन स्थिति पहले से कहीं बेहतर है और हम घाटी में शांति को और मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।’’

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कश्मीर को आतंकवाद मुक्त करने के लिए समय सीमा तय नहीं की जा सकती क्योंकि पाकिस्तान सशस्त्र आतंकवादियों को सीमा के इस पार लगातार भेज रहा है।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि हालांकि, सुरक्षा बल सीमा की सुरक्षा को और मजबूत कर रहे हैं ताकि पाकिस्तान की आतंकवादियों को सीमा पार भेजने की साजिश को नाकाम किया जा सके।

उन्होंने बताया, ‘‘ 28 मई को राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में आतंकवादियों का एक समूह नियंत्रण रेखा पार करने की कोशिश कर रहा था जिन्हें मार गिराया गया। एक दिन बाद एक अन्य मुठभेड़ हुयी और एक आतंकवादी मारा गया जबकि उसके दो साथी वापस चले गए।’’

दिलबाग सिंह ने कहा, ‘‘इसी तरह की कोशिश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुई। जनवरी महीने में हमारा सामना जैश ए मोहम्मद के तीन आतंकवादियों से हुआ जिन्हें नगरोटा में हुयी मुठभेड़ में मार गिराया गया। इससे पहले समूह ने उसी रास्ते से घुसपैठ की थी।’’

उन्होंने कहा कि इसी तरह की घुसपैठ की कोशिश कश्मीर में खासतौर पर कुपवाड़ा के केरन, करनाह और बारामूला के उरी में की गई।

पुलिस महानिदेशक ने कहा, ‘‘ पाकिस्तान ड्रोन के जरिये हथियार और मादक पदार्थ जम्मू-कश्मीर पहुंचाने की कोशिश कर रहा है और हम इस खतरे का मुकाबला करने के लिए कार्य कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सफलतापूर्वक उस ड्रोन को मार गिराया जिसमें एम-4 राइफल और कुछ हथगोले थे। यह पहली बार था जब ड्रोन को मार गिराया गया हालांकि, पाकिस्तान की ओर से ड्रोन भेजने की कोशिश पहले भी हुई थी।’’

दिलबाग सिंह ने बताया कि ड्रोन के जरिये भेजे जा रहे हथियार दक्षिण कश्मीर में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी अली भाई के लिए थे।

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