जरुरी जानकारी | आबादी के बड़े हिस्से की जरूरतों को पूरा करने को जी-20 अध्यक्षता ने नीतिगत दिशा दी: सीतारमण

नयी दिल्ली, छह नवंबर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता ने दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से की जरूरतों को पूरा करने के लिये एक स्पष्ट नीतिगत दिशा उपलब्ध करायी है। आबादी का यह वह हिस्सा है, जिनकी आवाज अक्सर बहुपक्षीय मंचों पर अनसुनी कर दी जाती है।

वित्त और श्रम मंत्रालयों तथा वाणिज्य विभाग के ‘मजबूत, सतत, संतुलित और समावेशी वृद्धि’ विषय पर आयोजित सेमिनार के उद्घाटन भाषण में वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, हमारे लिये इस मामले में अब भी काम करना बाकी है।’’

भारत को एक दिसंबर, 2022 को जी-20 की अध्यक्षता मिली थी।

सीतारमण ने कहा, ‘‘जी-20 नयी दिल्ली घोषणा (एनडीएलडी) पर समूह के सभी देशों ने सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली कुछ गंभीर चुनौतियों का समाधान करता है। साथ ही जन केंद्रित सिद्धांतों और भरोसे वाली साझेदारी पर आधारित भविष्य के लिये नीतियों के स्तर पर मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भले ही इस महीने के अंत तक जी-20 अध्यक्ष के रूप में हमारी भूमिका समाप्त हो रही है, ‘नयी दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन’ (नयी दिल्ली घोषणा) में नीति मार्गदर्शन के मामले में जो शुरुआत हुई है, उसकी गति बनाई रखी जानी चाहिए।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमें न केवल परिणामों को आगे बढ़ाने के लिए जी-20 भागीदारों के साथ जुड़ना चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाना चाहिए कि हम इन परिणामों को भारत की घरेलू नीति-निर्माण प्रक्रिया में कैसे एकीकृत कर सकते हैं ताकि हम उदाहरण के साथ नेतृत्व कर सकें।’’

सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक दक्षिण (विकासशील और अल्प विकसित देश) की चिंताओं और आकांक्षाओं को मुख्यधारा में लाने के लिये भारत की जी-20 अध्यक्षता में ठोस प्रयास किये गये।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि हमने जो जी-20 की अध्यक्षता प्रदान की है, उसने वैश्विक आबादी के बड़े हिस्से की जरूरतों को पूरा करने के लिये स्पष्ट नीतिगत निर्देश उपलब्ध कराये हैं। यह आबादी का वह हिस्सा है, जिनकी आवाज अक्सर बहुपक्षीय मंचों पर अनसुनी कर दी जाती है। हालांकि, हमारे लिये अब भी काम करना बाकी है।’’

मंत्री ने कहा कि महामारी के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था कई संकट से जूझ रही है। इससे वैश्विक वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि, पुनरुद्धार जारी है, लेकिन यह धीमा और असमान बना हुआ है।

वैश्विक वृद्धि दर की वर्तमान गति कमजोर बनी हुई है। यह महामारी से पहले के दो दशक में 3.8 प्रतिशत के औसत से काफी नीचे है। साथ ही मध्यम अवधि में आगे देखने पर वृद्धि की संभावनाएं और कमजोर हो गई हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक और घरेलू दोनों स्तरों पर नीतिगत समन्वय जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आर्थिक वृद्धि पटरी पर आए और मजबूत, टिकाऊ, संतुलित और समावेशी बनी रहे।

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