देश की खबरें | खाद्य सामग्री के मांसाहारी या शाकाहारी होने का पूर्ण खुलासा जरूरी : उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि किसी भी खाद्य सामग्री के शाकाहारी या मांसाहारी होने का पूरा खुलासा होना चाहिए, क्योंकि थाली में परोसी जाने वाली वस्तु से हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार प्रभावित होता है।

नयी दिल्ली, दो मार्च दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि किसी भी खाद्य सामग्री के शाकाहारी या मांसाहारी होने का पूरा खुलासा होना चाहिए, क्योंकि थाली में परोसी जाने वाली वस्तु से हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार प्रभावित होता है।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति डीके शर्मा की पीठ ने घरेलू उपकरणों और परिधानों सहित इस्तेमाल की जाने वाली ‘सभी वस्तुओं’ पर शाकाहारी या मांसाहारी होने का लेबल लगाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया है कि उत्पाद के घटक तत्वों और उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं के आधार पर किसी खाद्य सामग्री पर शाकाहारी या मांसाहारी होने का लेबल लगाया जाये।

अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील की उस दलील पर रजामंदी जताई कि आम जनता के बजाय केवल प्राधिकरणों को इस तरह के आदेश की जानकारी देना अर्थहीन है, क्योंकि इससे आम जनता के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। उच्च न्यायालय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित प्राधिकरणों को नया निर्देश जारी करके अवगत कराये।

अदालत ने एफएसएसएआई से कहा कि वह खाद्य पदार्थ के शाकाहारी या मांसाहारी होने के संबंध में पूर्ण खुलासा करने की बाध्यता से प्राधिकरणों को अवगत कराये। पीठ ने ने सभी राष्ट्रीय दैनिक समाचारपत्रों में नये आदेश का व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि संविधान के तहत थाली में क्या परोसा गया है, इस बात से अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को प्रदत्त मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।

अदालत ने कहा कि उसकी नजर में कसी खाद्य पदार्थ के शाकहारी या मांसहारी होने का पूरा और विस्तृत खुलासा करने को उपभोक्ता जागरूकता का हिस्सा बनाया जाना अहम है। पीठ ने कहा कि पैकेट बंद खाद्य पदार्थ के शाकाहारी या मांसाहारी होने का पूर्ण खुलासा करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने में अगर प्राधिकरण नाकाम रहता है तो इससे एफएसएसएआई के गठन का उद्देश्य भी हासिल नहीं हो सकेगा।

याचिकाकर्ता ‘राम गो रक्षा दल’ की ओर से अधिवक्ता रजत अनेजा ने कहा कि 22 दिसंबर, 2021 के आदेश में अभी बहुत अस्पष्टता है। याचिका पर अगली सुनवाई 21 मई को होगी। अदालत ने एफएसएसएआई और केंद्र को इस मामले में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि पहले के आदेश के संबंध में एफएसएसएआई ने 22 दिसंबर, 2021 को सभी संबंधित प्राधिकरणों को एक पत्र जारी किया था, जिसमें प्रत्येक पैकेट बंद ‘मांसाहारी’ खाद्य पदार्थ पर एक प्रतीक और रंग कोड अंकित करने के लिए कहा था।

अदालत ने कहा कि मांसाहारी या शाकाहारी भोजन के बारे में घोषणा अनिवार्य है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने कहा था कि मांसाहारी सामग्री का उपयोग और उस पर शाकाहारी लेबल लगाना शाकाहारियों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएगा और धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने के उनके अधिकार में हस्तक्षेप करेगा।

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