जरुरी जानकारी | ईंधन की मांग कोविड- 19 से पहले के स्तर पर लौटने लगी है: सरकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में लॉकडाउन के हटने और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ ही ईंधन की मांग धीरे धीरे कोविड- 19 से पहले के स्तर के नजदीक पहुंचने लगी है। सरकार ने बुधवार को कहा कि ईंधन की मांग कोविड- 19 से पहले के स्तर के 88 प्रतिशत तक पहुंच गई हे।

नयी दिल्ली, एक जुलाई देश में लॉकडाउन के हटने और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के साथ ही ईंधन की मांग धीरे धीरे कोविड- 19 से पहले के स्तर के नजदीक पहुंचने लगी है। सरकार ने बुधवार को कहा कि ईंधन की मांग कोविड- 19 से पहले के स्तर के 88 प्रतिशत तक पहुंच गई हे।

एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘ईंधन की मांग मई में बढ़नी शुरू हुई और जून में यह कोविड-19 से पहले के 88 प्रतिशत तक पहुंच गई। इससे पहले अप्रैल में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग 2007 के बाद के सबसे निचले स्तर तक गिर गई थी। कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिये 25 मार्च से देशभर में लगाये गये लॉकडाउन की वजह से मांग कमजोर पड़ गई थी।’’

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भारत दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है।

विज्ञप्ति में कहा गया है जून 2020 में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत 1.18 करोड़ टन तक पहुंच गई। यह जून 2019 के 1.34 करोड़ टन की खपत के मुकाबले 88 प्रतिशत तक पहुंच गई। जून में पेट्रोल की 20 लाख टन की खपत पिछले साल इसी महीने की खपत का 85 प्रतिशत रही है। वहीं डीजल की खपत 55 लाख टन पर सामान्य खपत स्तर का 82 प्रतिशत तक रही है।

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एलपीजी सिलंडर की मांग लगातार तेज गति से बढ़ रही है। पिछले साल जून के मुकाबले इस साल जून में यह 16.6 प्रतिशत बढ़ी है। वहीं विमान ईंधन (एटीएफ) की खपत में अप्रैल के स्तर से चार गुणा तक वृद्धि हुई है। इसके साथ ही सल्फर, पेटकोक और नाफ्था जैसे उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले ईंधनों की मांग क्रमश: 89.3 प्रतिशत, 118 प्रतिशत और 120.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं समुद्री क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की खपत एक साल पहले के मुकाबले 138.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर काम फिर शुरू होने से बिटुमेन की खपत में भी जून के दौरान 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

विज्ञप्ति के मुताबिक कुल मिलाकर सभी पेट्रोलियम उत्पादों की खपत सामान्य खपत के मुकाबले अप्रैल 2020 में 49 प्रतिशत से बढ़कर जून में 88 प्रतिशत तक पहुंच गई।

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